अपने हुनर को पहचान कर बन सकते हैं सफल

अक्सर हम दूसरों से सलाह लेते-लेते अपना काम, अपना तरीका बदल देते हैं। कई बार यह बदलाव सिर्फ किसी के कहने की वजह से किया जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि हम कामयाब नहीं हो पाते। मगर सही तरीका यह है कि सलाह लेने या मानने में बुराई नहीं है, बल्कि उसे अपनाते समय अपना दिमाग नहीं लगाना गलत होता है।

अपने ही कॅरियर में जितना गहरा जा सकते हैं, जाना चाहिए। जितनी मेहनत करनी है, अपने वर्तमान काम पर करनी चाहिए। हो सकता है कि तुरंत उस काम का सकारात्मक नतीजा न मिले। लेकिन बार-बार काम या तरीका बदलकर नया काम या नए तरीके से काम शुरू करने से ज्यादा बेहतर है कि जो कर रहे हैं उसमें अपना सौ फीसदी दें, आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

एक बार एक किसान को कुआं खोदना था। कोई 15-20 फुट खोद दिया गया, लेकिन पानी नहीं मिला। किसी ने सलाह दी कि यहां से कुछ दूर पानी हो सकता है। किसान ने वहां खुदवाना शुरू किया। 15-20 फुट खोद दिया गया, लेकिन यहां भी पानी नहीं मिला। फिर किसी और के कहने पर तीसरी जगह भी कोशिश की गई, लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं मिला। उस गांव के बूढ़े अनुभवी से पूछा गया। उसने भी जगह बताई और वहां भी 15-20 फुट खोद दिया गया। वहां भी पानी नहीं था।

संतों से पूछा गया। स्कूल टीचर से पूछा गया। डॉक्टर से पूछा गया। महात्माओं से पूछ लिया गया। जिसने भी जगह बताई सब जगह 15-20 फुट खोदकर देख लिया गया, लेकिन पानी नहीं मिला। फिर वो किसान थक गया और हारकर बैठ गया कि इतनी मेहनत के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है, करूं तो क्या करूं।

घर आए थके-हारे किसान से उसकी पत्नी ने परेशानी का कारण पूछा। उस किसान ने कहा, हर किसी से सलाह लेकर जहां-जहां लोगों ने बताया 15-20 फुट खुदवाया गया लेकिन कहीं भी पानी नहीं मिला। तो उसकी पत्नी ने कहा कि घर के बाहर जहां सबसे पहले खुदवाया था, वहीं पर और ज्यादा खुदवाओ। किसान ने यह बात मानते हुए उसी पहले वाले कुएं को खोदना शुरू किया। 15 फुट, 20 फुट, 25 फुट, 30 फुट, 35 फुट। आखिर पानी मिल गया।

काम की बात –

कई बार सफलता मिलने में समय लगता है। ऐसे में अगर आप बेचैन होकर इधर-उधर भटकने लगेंगे और किसी के कहे पर बिना अपना दिमाग लगाए काम करने लगेंगे, तो सफलता आपसे और भी दूर हो जाएगी। इससे अच्छा तो यह है कि आप जो कर रहे हैं उसी में लगातार बेहतर करने का प्रयास करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। कोई भी नया काम शुरू करने में नए सिरे से मेहनत करनी पड़ती है। जरा सोचिए आप अपना कितना कीमती समय पहले के काम में लगा चुके हैं। अब नए काम में फिर उतनी या उससे अधिक मेहनत करना कहां कि समझदारी है। इससे बेहतर है कि जो कर रहे हैं, उसमें अपना सौ फीसदी दें।