अपार है बिल्वपत्र की महिमा

बिल्वपत्र के वृक्ष को श्रीवृक्ष भी कहा गया है। मान्यता है कि इसकी जड़ों में महादेव का वास है। तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हों, तो उसे त्रिदेव का रूप मानते हैं। किंवदंती है कि एक बार पार्वती ने अपनी उंगलियों से अपने ललाट पर आया पसीना पोछकर फेंक दिया। उनके पसीने की कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं। उसी से बेलवृक्ष उत्पन्न हुआ। इसके ज्यादातर पेड़ों को मंदिरों के आसपास ही लगाया जाता है।

शिवपुराण में वर्णित है कि घर पर बेल का वृक्ष लगाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि जिस स्थान पर यह पौधा या वृक्ष होता है, वह काशी तीर्थ के समान पवित्र और पूजनीय स्थल हो जाता है। इसका प्रभाव यह होता है कि घर का हर सदस्य यशस्वी तथा तेजस्वी बनता है। साथ ही ऐसे परिवार में सभी सदस्यों के बीच प्रेम भाव रहता है। घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती।