अब ऑनलाइन होगी सरकारी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट, मरीज घर बैठे देख सकेंगे

इंदौर। मरीजों को अब अपनी जांच रिपोर्ट के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं लगाना होंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग प्रदेशभर के अस्पतालों में मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम शुरू करने जा रहा है। इसकी शुरुआत प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कालेजों से होगी।
इसमें सबसे पहले भोपाल और इंदौर को शामिल किया जाएगा। यह एनआईसी (नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर) के माध्यम से शुरू किया जाएगा। यह सिस्टम शुरू होने के बाद मरीज अस्पताल में होने वाली सभी जांचों की रिपोर्ट अपने घर पर ही देख सकेंगे। यह सुविधा अगस्त से भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी, उसके बाद इंदौर के एमवायएच और फिर अन्य सभी सरकारी अस्पतालों में शुरू होगी।

मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम पर ओपीडी में जांच कराने आने वाले मरीजों की पूरी जानकारी होगी। इसके माध्यम से डॉक्टर पर भी नजर रखी जाएगी। इससे यह पता चल पाएगा कि डॉक्टर ने पहला और आखिरी मरीज कब देखा। सोनोग्राफी व एक्सरे किया या नहीं। साथ ही दवाइयां कम पडऩे की समस्या भी खत्म हो जाएगी। दवाएं तभी कम पड़ेंगी, जब मरीजों को दी गई हों। कई बार मरीजों को दिए बिना ही दवाइयां कम पड़ जाती थीं।

मोबाइल और मेल पर भी मिलेगी जानकारी
मरीज के ओपीडी में डॉक्टर को बीमारी बताने पर मोबाइल नंबर या अपना ई-मेल आईडी देना होगा। इससे समय-समय पर उसके मोबाइल या मेल पर जांच रिपोर्ट मिलती रहेगी। एक्सरे के लिए भी अस्पताल के चक्कर नहीं काटना होंगे। इलाज के बाद पर्चा गुम होने पर मरीज के आईडी नंबर से ही पूरी जानकारी ली जा सकती है।

डॉक्टरों पर होगी सख्ती
अब डॉक्टर जांचों के बारे में गलत जानकारी नहीं दे पाएंगे, अस्पताल के सॉफ्टवेयर में एक बार जानकारी अपटेड होने के बाद उसे मिटाया नहीं जा सकेगा। इसमें किसी मरीज को गलत इंजेक्शन या लापरवाहीपूर्वक गलत जानकारी दी जाती है तो तुरंत पता चल जाएगा।

ये होंगे फायदे : डॉक्टरों व अस्पताल के स्टाफ के कामकाज पर रखी जा सकेगी नजर। मरीज का रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर में होने पर मरीज के रेफर होने के साथ ही उसका प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट व अन्य दस्तावेज ई-मेल से भेजे जा सकेंगे। अस्पताल के डॉक्टर के हर डेस्क पर कम्प्यूटर होने से काम में तेजी आएगी और मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा। दवाओं की मात्रा की जानकारी भी रखी जा सकेगी।एचएमआईएस सॉफ्टवेयर से डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों को मैसेज भी कर सकते हैं.कम्प्यूटर स्क्रीन पर मरीज की पूरी जानकारी के साथ ही पता चलेगा कि उसे पहले से कौन सी दवा दी जा रही है।