अयोध्या के ऐतिहासिक फैसले के बाद बोले PM मोदी

अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश की इच्छा थी कि इस मामले की रोजाना सुनवाई हो। दशकों तक चली न्यायिक प्रक्रिया का अब समापन हो गया है।

आज दुनिया ने यह भी जान लिया है कि भारत का लोकतंत्र कितना जीवंत है और कितना मजबूत है। फैसला आने के बाद हर वर्ग, हर समुदाय और हर पंथ के लोगों ने खुले दिल से इसे स्वीकार किया है। यह भारत के पुरातन संस्कृति को प्रतिबिंबित करता है।

पीएम मोदी ने कहा कि फैसला आने के बाद जिस प्रकार हर वर्ग, हर समुदाय और हर पंथ के लोगों सहित पूरे देश ने खुले दिल से इसे स्वीकार किया है, वो भारत की पुरातन संस्कृति, परंपराओं और सद्भाव की भावना को प्रतिबिंबित करता है।उन्होंने कहा कि भारत की न्यायपालिका के इतिहास में भी आज का ये दिन एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है।

इस विषय पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सबको सुना और बहुत धैर्य से सुना और पूरे देश के लिए खुशी की बात है कि सर्वसम्मति से फैसला दिया।बता दें कि फैसला आने के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि अदालत के फैसले को किसी की हार या जीत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की भी अपील की।मोदी ने फैसला आने के बाद कई ट्वीट कर कहा, ‘देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’ मोदी ने कहा कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में आम लोगों के विश्वास को और मजबूत करेगा।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘न्याय के मंदिर (उच्चतम न्यायालय) ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया।’ मोदी ने देशवासियों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि राम भक्ति हो या रहीम भक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारत भक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।मोदी ने कहा कि हमें भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है।

सुप्रीम कोर्ट ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में रामलला विराजमान को विवादित भूमि सौंपी और मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया। इसी के साथ अयोध्या में ही मस्जिद बनाने का इंतजाम भी कर दिया।  रामलला विराजमान को विवादित भूमि सौंपने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा भी खारिज कर दिया। साथ ही सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को किसी दूसरे जगह पांच एकड़ भूमि देने का आदेश दिया है।

अगस्त 2019 को अदालत ने इस मुद्दे की दैनिक सुनवाई सुनिश्चित की और 16 अक्तूबर तक 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद अपना अंतिम फैसला नवंबर में सुनाने की तारीख दी थी। इस दौरान शीर्ष कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी। सुप्रीम कोर्ट के लंबे फैसले में कुछ ऐसे तर्क रहे, जिनके आधार पर अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हुआ।