आज से महाकाल मंदिर में नौ दिनों तक शिव नवरात्रि का उल्लास

चंदन उबटन लगाया, मंगल गीत गूंजे

उज्जैन।शिव नवरात्रि महोत्सव की शुरूआत कोटितीर्थ स्थित श्री कोटेश्वर महादेव के पंचामृत अभिषेक पूजन के साथ महाकाल मंदिर में प्रारंभ हुई। शासकीय पुजारी की उपस्थिति में भगवान को चंदन का उबटन लगाया गया। वहीं महिलाओं ने ढोलक की थाप पर विवाह के मंगल गीत भी गाये। अब शिवरात्रि तक प्रतिदिन भगवान महाकाल भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देंगे।
इसलिये श्रीकोटेश्वर की पहले पूजन
पं. महेश पुजारी ने बताया कि जिस प्रकार नगरकोट माता पर अवंतिका नगरी की रक्षा का भार माना जाता है ठीक उसी प्रकार श्री कोटेश्वर महादेव पर महाकाल वन की रक्षा का भार भगवान महाकाल द्वारा सौंपा गया है। शिव नवरात्रि महोत्सव की शुरूआत कोटेश्वर महादेव के पंचामृत पूजन अभिषेक के साथ होती है। सुबह शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा एवं 11 ब्राम्हणों द्वारा श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन अभिषेक कराया गया। शिव नवरात्रि के अवसर पर 9 दिनों तक श्री कोटेश्वर महादेव के अलावा भगवान महाकाल के गण वीरभद्र और मान भद्र का अभिषेक किया जाता है और उनके बाद भगवान महाकालेश्वर का पूजन अभिषेक प्रारंभ होता है। श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन शिवरात्रि के अलावा प्रदोष पर भी किया जाता है।

अलग-अलग स्वरूप में होंगे दर्शन
नौ दिनों तक शिव नवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत भगवान को चंदन का उबटन और मां पार्वती को हल्दी लगाई जायेगी। इसके बाद भगवान महाकाल भक्तों को 9 दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों मनमहेश, शिव तांडव, घटाटोप, शेषनाग, छबीना, होल्कर, उमामहेश रूप में दर्शन देंगे।

वर्ष में एक बार दोपहर में भस्मार्ती
शिवरात्रि पर रात 9 से 12 बजे तक श्री कोटेश्वर पूजन होगा और उसके बाद रात 12 से सुबह 4 बजे तक भगवान महाकाल का महापूजन होगा। इसके बाद एक हजार बिल्वपत्र, सप्तधान, मुखौटा मंत्रोच्चार के बीच भगवान को अर्पित किया जायेगा। वहीं वंश परंपरागत पुजारी द्वारा भगवान महाकाल को सेहरा धारण कराया जायेगा। अगले दिन वर्ष में एक बार दोपहर में बाबा महाकाल की भस्मार्ती होगी।

कोटितीर्थ की सफाई के बाद पुताई
शिवरात्रि महोत्सव से पूर्व महाकाल मंदिर परिसर स्थित कोटितीर्थ कुंड की सफाई व पुताई का काम पीएचई विभाग द्वारा किया गया। वर्तमान में कोटितीर्थ को तल से ऊपर तक सफेद पेंट से पुताई कर साफ किया गया है। सुबह कोटितीर्थ के जल से ही भगवान श्री कोटेश्वर का पूजन अभिषेक भी सम्पन्न हुआ। वहीं महाकाल भक्त मंडल की महिलाओं द्वारा परिसर में ढोलक की थाप पर भगवान के विवाह के मंगल गीत भी गाये।