आत्मा व परमात्मा का मिलन ही वास्तव में शिव-विवाह है – साध्वी पदाम्हास्ता भारती

दादा देव मेला ग्राउंड, नज़दीक दादा देव मंदिर, सैक्टर-7, द्वारका, दिल्ली में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीराम कथामृत के प्रथम दिवस में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी पदमहस्ता भारती जी ने ‘शिव-विवाह’ प्रसंग प्रस्तुत किया। प्रसंग के रोचक, सरस व संगीतबद्ध प्रस्तुतिकरण में उन्होंने बताया कि श्रीरामचरितमानस के सात काण्ड यथार्थ में प्रत्येक मानव-जीवन के सात सोपान हैं। इन सभी से होकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक कर अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता है। सात काण्डों में वर्णित प्रभु की जीवन लीलाएं गूढ़ आध्यात्मिक संदेशों से ओतप्रोत है। परन्तु बह्मनिष्ठ सतगुरु के सान्निध्य के अभाव में महज कथा ही प्रतीत होती है। यथार्थ में ‘शिव-विवाह’ प्रसंग, मानव तन में ही आत्मा व परमात्मा के योग का संदेश देता है। मानव देह में गुरु-कृपा से प्रभु का साक्षात्कार करना ही योग है।

उन्होंने बताया कि श्रीरामकथा का आरम्भ ‘शिव-विवाह’ प्रसंग से किए जाने का उद्देश्य भी यही है। ‘शिव-विवाह’ आत्मा रूपी पार्वती व शिव रूपी परमात्मा के आध्यात्मिक विवाह का प्रतीक है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन का लक्ष्य प्रभु को प्राप्त करना है तथा अपने इसी लक्ष्य को भूले हुए मानव को पुनः लक्ष्य तक पहुँचाने हेतु ही प्रभु श्रीराम का अवतरण बार-बार धरा पर होता है।

सुश्री पदमहस्ता भारती जी ने कहा कि प्रभु राम मानने का नहीं जानने का विषय है, तर्क का नहीं, दर्शन का विषय है। उन्होंने बताया कि आज सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से विश्वभर में असंख्य लोगों ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर आध्यात्मिक अनुसंधान द्वारा प्रभु का साक्षात्कार प्राप्त किया है। प्रभु राम को ‘जान’ लेना ही यथार्थ में भक्ति है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं के विशाल समूह ने भाव विभोर हो कथा रस का पान किया।