आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य सनातन संस्कृति के संवाहक थे- स्वामी रंगनाथ

उज्जैन। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज ने सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु संपूर्ण भारतवर्ष में पैदल भ्रमण कर स्थान-स्थान पर भारतीय संस्कृति तथा सनातन संस्कृति का प्रचार किया। संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने के लिए चारों पीठों की चार दिशाओं में स्थापना कर भारतीय संस्कृति तथा उसके मूल्यों की तथा सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए अद्वितीय कार्य किया। आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य सनातन संस्कृति के संवाहक थे इसलिए आज शंकराचार्य जयंती पर आदि जगद्गुरु का पुण्य स्मरण करते हुए हम सब गौरान्वित हैं। उक्त उद्गार अवंतिका पीठाधीश्वर स्वामी रंगनाथजी महाराज ने अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित भगवान परशुराम प्रकटोत्सव तथा शंकराचार्य जयंती त्रिदिवसीय समारोह के समापन अवसर पर उपस्थित ब्राह्मणों विप्रजनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज के द्वारा संतश्री रंगनाथ महाराज, युवराज प्रपन्नाचार्य महाराज, सामवेद के विद्वान पं. कमलाशंकर त्रिवेदी, संस्कृत विद्यालय के आचार्य सदानंद त्रिपाठी, वैदिक विद्वान आचार्य वासुदेव शास्त्री, पं. नारायण उपाध्याय धर्माधिकारी, महाकालेश्वर मंदिर समिति के सदस्य विभाष उपाध्याय का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी, पूर्व अध्यक्ष पं. जियालाल शर्मा, पं. राजेंद्र शर्मा गुरु, पं. शैलेंद्र द्विवेदी, प्रदीप तिवारी, संजय दिवटे, अभिजीत दुबे, गौरव उपाध्याय, वेदप्रकाश त्रिवेदी, ममता उपाध्याय, मोहिनी दुबे, इंदिरा त्रिवेदी आदि ने भी उपस्थित होकर संतों का सम्मान किया।