आपकी पहल से ही होती बड़े बदलाव की शुरुआत

काफी समय पहले की बात है। एक लड़का रोजाना सुबह-सुबह दौड़ने जाता था। वह जब भी वापस आता तो उसे रास्ते में एक बुजुर्ग महिला दिखती। वह बुजुर्ग महिला को देखता कि वह रोज तालाब के पास जाकर कछुओं की पीठ साफ करती। वह काफी सोच में पड़ गया कि आखिर में बुजुर्ग महिला क्यों कछुए की पीठ को साफ करती है? यह पता करने के लिए एक दिन वह महिला के पास पहुंचा।

बुजुर्ग महिला ने कछुए की पीठ को साफ करने की वजह पूछी। इसपर बुजुर्ग महिला ने कहा कि मुझे इससे काफी सुख और शांति मिलती है। उन्होंने आगे कहा कि मैं इसलिए ऐसा करती हूं क्योंकि कछुए की पीठ पर कई बार कचरा जम जाता है। ऐसे में उन्हें तैरने में मुश्किल आने लगती है। अगर यही ज्यादा समय तक कचरा रहे तो कछुए का कवच भी कमजोर हो जाता है।

बुजुर्ग महिला का जवाब सुनकर लड़के ने कहा कि यूं तो आप बहुत अच्छा काम कर रही हैं। आप कछुओं की सेवा करती हैं। लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि आप केवल कुछ कछुओं की ही सेवा कर पाती हैं। आप के अकेले बदलाव से कोई बड़ा बदलाव नहीं आ सकता है।

इस पर बुजुर्ग महिला ने लड़के को जवाब दिया कि हमारे अकेले बदलाव से कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा लेकिन अगर बाकी लोग भी ऐसे ही करने लगें तो एक न एक दिन जरूर बदलाव आएगा। हमेशा लोगों को छोटे बदलाव से ही शुरुआत करनी चाहिए।

इस कहानी से मिलती है ये सीख – 
– कोई भी अच्छी पहल करने से हिचकिचाएं नहीं, ये न सोचें इसका अंजाम क्या होगा।
– आपकी पहल से ही बदलाव की शुरुआत होगी।
– हर काम कभी न कभी पहली बार होता है। आपका काम और पहल ही लोगों की सोच में बदलाव लाएगा।