उज्जैन की सातों सीटों पर कोई भी महिला चेहरा नहीं

उज्जैन। नगरीय निकायों चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण के बावजूद इस बार भी बड़े दलों ने महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी दिखाई। भाजपा-कांग्रेस उज्जैन की सातों विधानसभा सीटों में से किसी एक पर भी महिला नेत्री को चुनाव में नहीं उतारा। यही वजह रही कि शहर की महिलाओं ने इसे लेकर खासी नाराजगी जताई है। भाजपा ने 230 में से 25 तो कांग्रेस ने 229 में से 28 महिलाओं पर भरोसा जताया। ताज्जुब की बात है कि दोनों दलों ने महिला विंग की प्रमुखों को भी जिताऊ नहीं माना।
उज्जैन की सातों सीटों में इस बार दोनों ही प्रमुख दलों में इस बार भी किसी भी महिला दावेदार को प्रत्याशी नहीं बनाये जाने से महिला नेत्रियों में खासी निराशा रही है। यही नहीं पार्टियों की पदाधिकारियों के साथ महिला कार्यकर्ता और यहां तक की महिला वोटर भी नाराज हैं। हालांकि बीजेपी से तो उज्जैन उत्तर और दक्षिण में तो पहले से ही महिला दावेदार का नाम नहीं चला था, लेकिन पार्टी को यहां कोई महिला चेहरा नजर ही आया।

हालांकि कांग्रेस छोड़कर कुछ वर्ष पूर्व बीजेपी में आने वाली श्रीमती प्रीति भार्गव और विधायक रहे मोहन यादव की बहन और पार्षद और नगर निगम में जलकार्य समिति की अध्यक्ष कलावती यादव का नाम भी यहां की बड़ी बीजेपी लीडर में शुमार रहा। दूसरी ओर उज्जैन उत्तर में कांग्रेस की नूरी खान और माया त्रिवेदी और दक्षिण से खुद शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष अंजू जाटवा टिकिट की आस रख रहीं थीं। लेििकन अंजू जाटवा को यह कहा गया कि आपको शहर अध्यक्ष की जवाबदारी है, आप इंतजार करो, फिलहाल उज्जैन उत्तर और दक्षिण की सीटों के उम्मीदवारों के लिए काम करो। हालांकि अंजू जाटवा को आने वाले समय में कांग्रेस हाईकमान से खासी उम्मीदें हैं।

इधर उज्जैन उत्तर से नूरी खान इस साल की शुरूआत से ही सक्रिय थीं, लगातार आंदोलनों के साथ सुर्खियों बनी रहीं लेकिन एनचुनाव के समय कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी और लीडर ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रेस कांफ्रेंस में नूरी खान को पास की सीट से उठाया जाना ही इस बात का संकेत दे गया था, कि वे उज्जैन उत्तर से चुनाव की दावेदारी ना करें। हालांकि इस बात से अल्पसंख्यक समाज में अंदरूनी नाराजगी भी रही, लेकिन धीरे-धीरे सब मैनेज हो गया। इधर नूरी खान ने भी बाद में प्रेसवार्ता कर नाराजगी दबा ली और कह दिया कि उनकी और ज्योतिरादित्य के बीच गलतफहमी रही। लेकिन इस प्रेस कांफ्रेस में ही यह जाहिर हो गया था, नूरी को उत्तर से कांग्रेस नहीं उतारने वाली। नूरी ने इसके बाद उज्जैन में अपनी सक्रियता कम कर दी थी।