उबटन लगाने से शिशु को मिलते हैं ये 4 बड़े फायदे.

नवजात शिशु को देखभाल की ज्यादा जरूरत होती है। शिशु की अच्छी सेहत और साफ-सफाई के लिए हमारे यहां परंपरिक रूप से उबटन लगाया जाता है। दरअसल नवजात शिशु को तरह-तरह के संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है।

उबटन न सिर्फ शिशु के शरीर से अतिरिक्त बाल को निकालता है, बल्कि उसकी अच्छी सेहत के लिए भी बहुत जरूरी होता है। आइए आपको बताते हैं शिशु को उबलट लगाने के फायदे और उबटन के प्रकार।

उबटन से बेहतर रक्त संचार :

शिशु के शरीर पर उबटन लगाने से उसके शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। शिशु के नाजुक शरीर में रक्त का प्रवाह जितना अच्छा होगा, उसका मानसिक और शारीरिक विकास उतना अच्छा होगा। इसलिए शिशु के लिए उबटन जरूरी माना जाता है।

शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकाले :

इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं कि उबटन लगाने से शिशु के शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। इसके साथ ही उबटन के प्रयोग से शिशु की त्वचा में निखार आता है, जो जीवनपर्यंत बना रहता है।

त्वचा को मॉश्चराइज करे :

उबटन में तेल का भी प्रयोग किया जाता है इसलिए इसे लगाने से शिशु की त्वचा को जरूरी नमी मिलती है। सर्दियों में खासकर सर्द और रूखी हवा के कारण त्वचा ज्यादा रूखी होती है। आमतौर पर ज्यादातर शिशुओं को सरसों का तेल सूट करता है।

त्वचा के अतिरिक्त बाल निकाले :

छोटे बच्चों के शरीर से अनचाहे बालों को हटाने के लिए और तमाम स्वास्थ्य लाभों के कारण बहुत पुराने समय से उबटन लगाने की परंपरा है। आमतौर पर आटे का उबटन शिशु के लिए बेहतर होता है।

यह भी माना जाता है कि आटे की मालिश से रक्त संचरण को बढ़ावा मिलता है और शरीर से विषैले तत्व निकालने में भी मदद मिलती है। कुछ लोग मानते हैं कि बेसन और हल्दी से बना उबटन या फिर आटे, कच्चे दूध और गुलाब जल का लेप भी रोएं हटाने में मदद करता है।

कौन सा उबटन है बेहतर :

शिशु की नाजुक त्वचा के लिए आटे का उबटन बहुत अच्छा माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले थोड़ा सा आटे में ऑलिव ऑयल, थोड़ी हल्दी और पानी डालकर इसे मुलायम गूंथ लें। अब इसे गुनगुने तेल में डुबोकर शिशु के शरीर पर लगाकर मालिश करें। आटे की लोई को मुलायम बनाएं और त्वचा पर धीरे-धीरे लगाएं क्योंकि शिशु की त्वचा बहुत नाजुक होती है।