एक-दूसरे को समझना क्या मुश्किल है?

दफ्तर या कार्यस्थल पर अक्सर ही लोग टकराव की स्थिति में खुद को पाते हैं। उन्हें लगता है कि वे सही हैं लेकिन उनकी बात को दूसरे समझ नहीं पा रहे हैं। इस तरह का टकराव पति-पत्नी के बीच रिश्तों में भी आता है और माता-पिता के साथ भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। इस टकराव को टालने के लिए आपको यह देखने की जरूरत होगी कि आप किस पायदान पर खड़े हैं। आपको इस टकराव का असर अपने ऊपर नहीं होने देना है बल्कि उससे खुद का बचाव करना है। इसके अलावा अपनी बात को ठीक से रखना सीखना होगा ताकि आप टकराव को टाल सकें।
बातचीत का तरीका ऐसा होना चाहिए आप यह तय न करें कि कौन व्यक्ति गलत है बल्कि यह पता लगाएं कि सही बात क्या है। आपका ध्यान व्यक्ति पर नहीं बल्कि उसकी कही बात पर होना चाहिए। चीजों को उनकी पृष्ठभूमि के साथ देखना बंद करें और उनकी गुणवत्ता के आधार पर उनका फैसला करें। इसमें पांच एफ आपकी मदद कर सकते हैं। ये हैं, बी फे्रंडली, फेयर, फ्रेंक, फर्म और फ्लेक्सिबल। यानी आप दूसरों के प्रति मित्रवत रहें, सच बोलें, निडर होकर बोलें, दृढ़ता से बोलें और दूसरों के सुझावों को अपनाने के लिए लचीलापन रखें। किसी भी बने-बनाए उत्तर की बजाय आपको इन पांच एफ के साथ अपना उत्तर तलाशना चाहिए।

जब आप इस तरह जिंदगी की मुश्किलों के हल तलाशने लगेंगे तो पाएंगे कि आपकी जिंदगी आसान हो रही है। एक छोटी-सी कहानी से इस बात को समझिए। एक बच्चा चिल्लाते हुए अपने घर में घुसता है, मम्मी अपने घर के बाड़े में एक बड़ी बिल्ली घुस आई है जो शेर जितनी बड़ी है। मां कहती है, ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर मत बताओ। मगर मां यह समझना भूल जाती है कि बच्चा अपने सीमित ज्ञान की वजह से सही चीज नहीं बता पा रहा है। अगर आप दूसरों को समझने की कोशिश करेंगे तो आपको उनकी बात भी समझ आ जाएगी।

कई बार लोग अपनी बात को ठीक से समझा नहीं पाते हैं लेकिन तब भी उनकी बात समझना आपके लिए जरूरी हो जाता है। अगर आप अपने अंदर दूसरों को नकारने का भाव रखेंगे तो आप कभी कुछ अच्छा नहीं सुन पाएंगे और अक्सर खुद को ही श्रेष्ठ समझते रहेंगे। आत्मविश्वास होना चाहिए लेकिन अपनी श्रेष्ठता का दंभ नहीं। रिश्तों में एक ही बार सबकुछ स्पष्ट कर देने से काम नहीं चलता है बल्कि वहां बार-बार दूसरों की बातों को धैर्य से सुनने की जरूरत होती है। रिश्तों को मजबूत और मधुर बनाने के लिए बार-बार दूसरों को समझने की जरूरत बनी रहती है। जिन रिश्तों को बनाए रखना कोई चुनौती नहीं है या जहां एकदूसरे को संभालने जैसी कोई बात नहीं है, उन रिश्तों में कोई आनंद भी नहीं हैै। आपको प्रेम के सहारे ही चीजों की खोज करना चाहिए और करुणा तक पहुंचना चाहिए।

आपको लगता है कि लोग बहुत टेढ़े हैं मगर असल में आप देखेंगे तो वे बहुत ही सरल होते हैं। शुरुआत में वे अडिय़ल रहेंगे क्योंकि उनके भीतर चीजें स्पष्ट नहीं हैं लेकिन थोड़ी देर की बातचीत में आप उन्हें आसानी से सहमत होता पा सकते हैं। आप सरल रहिए और जीवन को सरल रखिए। अक्सर हमारी आदतें हमारी परेशानी की वजह बन जाती हैं। हम दूसरों को देखने का तय ढांचा बना लेते हैं। तब हम आदतों के गुलाम हो जाते हैं।