एनपीए के नाम पर लोन पर रोक

उज्जैन। अधिकतर बैंकों ने नये ऋण प्रकरण स्वीकृत करने पर आंतरिक रूप से रोक लगा रखी है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कुछ बैंकों को एनपीए के आधार पर नये ऋण स्वीकृत न करने की हिदायत दी है। पहली तिमाही के बाद वित्तीय स्थिति को देखकर नये ऋण स्वीकृत करने पर विचार किया जायेगा।
बैंकों में गृह निर्माण, फैक्ट्री, उद्योग, गोल्ड लोन, वाहन ऋण सहित निजी ऋणों पर फिलहाल रोक लगी हुई है तथा विभिन्न आवेदकों को यह कहा जा रहा है कि रिजर्व बैंक ने अभी नये ऋण स्वीकृत न करने की बात कही है। पहले बैंकों को एनपीए खातों की स्थिति सुधारनी है। जिन पुराने ऋण प्रकरणों में वसूली अटकी पड़ी है और लंबे समय से किश्तें जमा नहीं हो रहीं उनका समाधान करना बैंकों को अनिवार्य किया गया है।

सूत्र बताते हैं कि यह रोक एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया जैसी लीड बैंकों पर नहीं है बावजूद इसके इन बैंकों में भी ऋण स्वीकृति के सैकड़ों मामले मार्च माह से ही अटके पड़े हैं वहीं देना बैंक, इलाहाबाद बैंकजैसी अन्य बैंकों में भी ऋण प्रकरणों की स्वीकृति पर टालमटोल जारी है। नाम न छापने की शर्त पर विशेषज्ञों ने बताया कि रिस्क कवर न होने की स्थिति में बैंक अधिकारी ऋण स्वीकृत करने का जोखिम नहीं ले रहे। क्योंकि पूर्व के ऋण प्रकरणों के अटके मामले और वसूली की राशि लम्बी है और बैंक निजी ऋण जमा के एवज में एक सीमा तक स्वीकृत कर सकती है अत: एनपीए खातों की स्थिति सुधारने तथा पहली तिमाही के परिणाम देखने के बाद ही नये ऋण स्वीकृति पर विचार होगा।

यह होगा असर
बैंकों की ऋण स्वीकृति अटकने के कारण बाजार में प्रभाव यह होगा कि भवन निर्माण व्यवसाय, वाहन एवं मोटर व्यवसाय, गोल्ड ऋण, शिक्षा ऋण तथा अन्य निजी कार्यों के लिये लिये जाने वाले ऋणों से आने वाली राशि बाजार में नहीं आ पायेगी और इसका असर व्यापार और विकास पर भी पड़ेगा।

इनका है कहना
लीड बैंकों के लिये ऐसे कोई निर्देश नहीं हैं। जिन बैंकों को एनपीए खातों में राशि ज्यादा अटकी पड़ी होने के कारण अधिसूचित किया गया है वह सूची आरबीआई की वेबसाईट से देखी जा सकती है। हमारे यहां ऐसे कोई मामले एनपीए के कारण नहीं रोके जा रहे।
राजेश चौरे, एसबीआई उज्जैन