औचक निरीक्षण: सुबह 8 बजे माधवनगर अस्पताल पहुंचे कलेक्टर, आधा स्टाफ नदारद मिला

डॉक्टर को कहा आपको लेने कार भेजू क्यां, पांच मिनट देरी से पहुंचने वालों का भी वेतन काटो

माधव नगर अस्पताल में सोमवार सुबह 8 बजे कलेक्टर शशांक मिश्र अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। इस दौरान यहां करीब 60 कर्मचारी नदारद थे ही खुद अस्पताल प्रभारी डॉ. महेश मरमट भी नहीं आए थे। इस पर मिश्र ने उन्हें कॉल कर दिया। पूछा कि क्यां आपको लेने के लिए मुझे कार भेजना पड़ेगी।

इसके बाद उन्होंने यहां का हाजिरी रजिस्टर चैक कर पांच मिनट भी लेट आने वालों की गैर हाजिरी लगा दी। इस कार्रवाई से अस्पताल में हड़कंप मच गया। कलेक्टर मिश्र सुबह सादी कार से अस्पताल पहुंचे और प्रभारी डॉ. मरमट का पूछा। पता चला कि डॉ. मरमट अस्पताल के नजदीक ही राजस्व कॉलोनी में रहते हंै।

इस पर मिश्र ने मोबाइल से कॉल कर उनकी खिंचाई कर दी। बाद में उन्होंने हाजिरी रजिस्टर चैक किया, जिसमें कर्मचारियों की अनुपस्थिति देख उनके नामों के आगे क्रास लगाना शुरू कर दिया।

पांच मिनट बाद ही कुछ नर्से आ गईं। बताया यूनिफार्म पहनने स्टाफ रूम में गई थी। मिश्र नहीं माने और उनकी भी गैर हाजिरी लगाते हुए हिदायद की कि 8 बजे काम शुरू हो जाना चाहिए। बाद में उन्होंने सीएमएचओ एमएल मालवीय को कॉल कर गैरहाजिरी रहे कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।

कुछ ही देर बाद हो गई घटना, रिपोर्ट दर्ज
उर्दुपुरा निवासी दीपक पिता भेरूसिंह पंवार मारपीट में उंगली फैक्चर होने पर ६ फरवरी को माधवनगर अस्पताल के हड्डी वार्ड में भर्ती हुआ था। उसे आराम होने पर 9 फरवरी को डॉक्टर ने उसकी छुट्टी कर दी गई थी। बावजूद वह घर नहीं जा रहा था।

सुबह डॉ. मरमट ने ठीक होने और डिस्चार्ज करने का हवाला देकर उसे जाने का कहां। दीपक उसकी मां व मामा से डॉ. मरमट का विवाद हो गया। मामले में डॉ. मरमट ने बताया कि तीनों के खिलाफ माधवनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की है।

मुझे पता है दौरा कैसे करना है

जिम्मेदारों के अनुपस्थित होने पर कलेक्टर मिश्र अकेले ही अस्पताल का निरीक्षण करने लगे। इस पर स्टोर में पदस्थ कर्मचारी उनके साथ चलते हुए जानकारी देने का प्रयास करने लगे।

इस पर कलेक्टर ने सभी को डपटते हुए कहां कि वे अपनी ड्यूटी पर पहुंचे। उन्हें दौरा करना आता है। वे करीब आधे घंटे तक वार्ड व व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद रवाना हो गए। उनके जाने के बाद डॉ. मरमट अस्पताल पहुंचे और कलेक्टर के दौरे के संबंध में पूछताछ की।

वर्षों से ब्लडबैंक में रखी एफेरेसिस मशीन का कल होगा उद्घाटन

जिला चिकित्सालय में प्लेटरेट्स पीडि़त मरीजों को मिलेगी सुविधा

उज्जैन। वर्ष 2010 में जिला चिकित्सालय की पैथालॉजी को राज्य शासन की ओर से करीब 14 लाख रुपये कीमत की एफेरेसिस मशीन उपलब्ध कराई गई थी। लायसेंस नहीं मिलने के कारण यह मशीन ब्लड बैंक में वर्षों से रखी थी जिसका कल स्वास्थ्य मंत्री द्वारा उद्घाटन किया जाएगा।

जिला चिकित्सालय के पैथालॉजी ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एस.एन. भिलवार ने चर्चा में बताया कि एफेरेसिस मशीन जिला चिकित्सालय को वर्ष 2010 में राज्य शासन से प्राप्त हुई थी जबकि कंपोनेंट सेपरेशन मशीन वर्ष 2016 में जिला चिकित्सालय द्वारा खरीदी गई, लेकिन लायसेंस नहीं होने के कारण उक्त मशीनों से कार्य प्रारंभ नहीं हुआ था।

उक्त दोनों मशीनों के लायसेंस प्राप्त होने के बाद कल स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इनका विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। डॉ. भिलवार के अनुसार कंपोनेंट सेपरेशन मशीन के प्रारंभ होने से एनीमिया पीडि़तों को पैक्ड आरबीसी, झुलसे मरीजों को प्लाज्मा, हियोफिलिया पेशेंटों को उपचार की सुविधा मिलेगी।

यह सुविधा बीपीएल, गर्भवती, कैंसर पीडि़त, टीबी, एचआईवी और लावारिस मरीजों के लिये पूर्णत: नि:शुल्क रहेगी, जबकि एपीएल मरीजों को 500 रुपये प्रोसेसिंग फीस देना होगी।

यह होगा मरीजों को लाभ
एफेरेसिस मशीन का उपयोग डेंगू आदि बीमारियों से पीडि़त मरीजों के उपचार के लिये होगा। ऐसे मरीज जिनके प्लेटरेट्स कम होते हैं उन्हें स्वस्थ डोनर का ब्लड लेकर प्लेट्रेट्स निकालकर वही ब्लड पुन: डोनर के शरीर में पहुंचा दिया जाता है।

इस प्रक्रिया के लिये करीब 9 हजार रुपये की किट्स आती है। यह किट मरीजों को किस प्रकार उपलब्ध कराई जायेगी यह अस्पताल प्रबंधन निर्धारित करेगा।