कमर्शियल टेलरिंग कॉलेज मुंबई ने दिया था डिप्लोमेंट सर्टिफिकेट

विदेशों में निर्मित सिलाई मशीन पर ली थी ट्रेनिंग

टेलरिंग के क्षेत्र में शहर में कई ऐसी हस्तियां हैं जिनका नाम शहर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में चर्चित है। इन्हीं में एक नाम शौकत हुसैन का जो कि लाल मस्जिद चौराहे के समीप ब्राह्मण गली के मोड पर गनी टेलर्स के नाम पर वर्षों से सिलाई की दुकान संचालित कर रहे हैं।

नागौरी मोहल्ला निवासी 62 वर्षीय शौकत हुसैन आठ दस साल की उम्र से ही अपने पिता अब्दुल गनी के साथ टेलरिंग का काम सीखने लगे और उसके बाद उन्होंने इस कार्य में विशेषज्ञता हासिल की।

मुंबई के कमर्शियल टेलरिंग कॉलेज में 2 वर्ष तक टे्रनिंग की और उसके बाद सन 1982 में टेलरिंग कॉलेज द्वारा बाम्बे डिप्लोमेंट सर्टिफिकेट प्रदान किया जोकि आज भी उनकी दुकान पर लगा देखा जा सकता है।

कोट आल्टर की शुरुआत
शौकत हुसैन के पिता अब्दुल गनी ने एक जमाने में उज्जैन शहर में कोट आल्टर की शुरूआत की। उस समय कोट आल्टर नहीं होता था और अन्य कारीगर यह कार्य नहीं कर पाते थे।

कोट आल्टर की शुरूआत होने से लोगों को भी काफी फायदा मिला। अपने पिता के समान ही शौकत हुसैन को अमेरिकन जोधपुरी कोट का आल्टर करने में महारत हासिल है।

ग्राहकों से लेते हैं वाजिब रेट
बैंक अधिकारी कालिदास कल्याणे के मुताबिक शौकत हुसैन की दुकान वर्षों पुरानी है। इनकी खासियत यह है कि ये काम के वाजिब रेट लेते हैं और मेहनत और इमानदारी से काम करते हैं। कई ग्राहक ऐसे हैं जो कि इनके यहां पर वर्षों से सिलाई एवं आल्टर का काम करवाने आते हैं।

विदेशी मशीनों पर ट्रेनिंग
शौकत हुसैन ने सन 1790, 1850, 1862में विदेशों में निर्मित की गई सिलाई मशीनों पर टे्रनिंग ली। भारत में 1935 में उषा कंपनी की बनाई गई सिलाई मशीन पर भी उन्होंने वर्षों तक काम किया।