काम के लिए जुनून पहुंचाता है मंजिल पर, जानिए स्टीव जॉब्स के सफलता सूत्र

स्टीव जॉब्स के नाम से शायद ही कोई शख्स अनजान होगा। यह उस इन्सान का नाम है जो आज इस दुनिया में तो नहीं है मगर उनकी सोच और व्यक्तित्व हर उम्र के लोगों को प्रेरणा देता है। स्टीव जॉब्स का जन्म 1955 में सैन फ्रांसिस्को अमेरिका में हुआ था, कैंसर के कारण उनकी मृत्यु 5 अक्टूबर 2011 में कैलिफोर्निया में हुई थी।

जॉब्स ने मरने से पहले अपनी जिंदगी में वह मुकाम हासिल किया जो इतनी कम उम्र में बिरले ही किसी को मिल पाता है। उन्होंने अपने जीवन में कड़ा संघर्ष किया और अपने लिए एक ऐसा मुकाम बनाया, जहां से कोई उन्हें हिला नहीं सका। उनके बताए सफलता के सूत्र हम सभी के लिए प्रासंगिक हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में

जुनून के साथ काम करें 
किसी भी काम को करने के लिए आपके अंदर जुनून होना चाहिए। यानी जिस काम को भी आप करते हैं उससे आपका लगाव होना चाहिए। ऐसा ना हो कि आप उस काम को जबरदस्ती कर रहे हैं क्योंकि जबरदस्ती वाला काम बहुत ज्यादा दिनों तक आप अच्छे से नहीं कर सकते।

जो होता है सब अच्छे के लिए होता है 
स्टीव जॉब्स का जीवन बड़ा ही उतार-चढ़ाव वाला रहा। वह हमेशा यही कहते थे अगर आपके साथ बुरा भी हो रहा है तो उसमें कुछ ना कुछ अच्छा होता है। यह बात गीता में भी कही गई है। मगर हम इसे मानते नहीं हैं। इसके विपरीत जॉब्स इस विचार को पूरी तरह से मानते थे।

अपने काम की गुणवत्ता बनाए रखें  
सक्सेस का एक और बड़ा मंत्र है अपने काम की गुणवत्ता को ध्यान रखना। स्टीव जॉब्स ने बताया कि अगर आपका कोई प्रोडक्ट है या आप कोई भी सेवा देते हैं उसमें गुणवत्ता होनी चाहिए। अगर आपने ऐसा कर लिया तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अपने काम और सेवाओं की गुणवत्ता पर ध्यान दीजिए।

टीम पर विश्वास करें और उसका साथ दें 
अगर आप टीम के साथ काम कर रहे हैं तो आपको अपनी टीम पर और अपनी टीम के काम पर विश्वास करना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप अपना ही नुकसान कर रहे हैं क्योंकि टीम के जरिये आप उस मिशन की ओर बढ़ रहे हैं, जो आप करना चाहते हैं। इसीलिए हमेशा टीम में विश्वास बनाए रखें और उनके काम पर भी विश्वास करें।

आलोचकों और प्रतियोगियों से सीखें
आपके प्रतियोगी क्या कर रहे हैं इसका आपको अच्छे से पता होना चाहिए। इसी तरह अपने आलोचकों से भी हमेशा सीखना चाहिए। यह दोनों ही आपके काम का बारीकी से आकलन करते हैं। प्रतियोगी को देखकर आपको आगे का रास्ता बनाने में मदद मिलती है, तो आलोचक आपकी हर हरकत पर नजर रखते हैं और बिना भेदभाव के आपकी खामियां बताते हैं।