कुछ नया करने में हिचकिचाएं नहीं

अंकुर नागपाल वह शख्स हैं, जिन्होंने लोगों की पढ़ने-पढ़ाने की जरूरत को अपने स्टार्टअप ‘टीचेबल’ से आसान बनाया है।

वे इस ऑनलाइन टीचिंग प्लेटफॉर्म के संस्थापक और सीईओ हैं, जो दुनिया के किसी भी व्यक्ति को अपने किसी भी हुनर को ऑनलाइन कोर्स के रूप में पढ़ाने की सहूलियत देता है।

दूसरे ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म से अलग ‘टीचेबल’ के ग्राहक सिर्फ शिक्षक हैं। इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद शिक्षक व संस्थाएं अपने कोर्स से जुड़े वीडियो अपलोड करते हैं, छात्रों से संवाद करते हैं और कोर्स फीस प्राप्त करते हैं। इस प्लेटफॉर्म से मिलने वाली सेवाओं के लिए तय भुगतान करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए फोर्ब्स ने उन्हें 2019 की 30 अंडर 30 सूची में जगह दी है।

कैसे हुए प्रेरित : अंकुर नागपाल की जड़ें मुंबई शहर से जुड़ी हैं। हालांकि वे परिवार के बीच ओमान देश में पले-बढ़े। पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख किया। वहां कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस और इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की।

उन्होंने पढ़ाई के बीच अपने हॉस्टल के कमरे में अपना पहला बिजनेस शुरू किया। वे अपने खाली समय में हॉस्टल के कमरे में फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफॉर्म और मोबाइल गेम्स के लिए तरह-तरह के एप्स बनाने लगे, जिससे उनकी अच्छी-खासी कमाई होने लगी। हालांकि बदलती तकनीक और हालात के बीच उनका यह बिजनेस चला नहीं।

हर वक्त तकनीक से घिरे रहना उन्हें भाया नहीं और एक अन्य जगह का रुख किया, जहां वे मार्केटिंग कोर्सेज पढ़ाने लगे। इसकी वजह सिर्फ इतनी थी कि वे अब तक नहीं जानते थे कि वे अपनी जिंदगी में करना क्या चाहते हैं। उन्होंने अध्यापन में ही कदम आगे बढ़ाने का मन बनाया और अपने दोस्त के साथ मोबाइल मार्केटिंग कोर्स को ‘उडेमी प्लेटफॉर्म’ के जरिये ऑनलाइन पढ़ाने लगे।

वे इससे कमाई तो कर रहे थे, पर उन्हें यह बात सही नहीं लगी कि जिस कोर्स को वह छात्रों को पढ़ा रहे थे, उसमें उनका कोई नियंत्रण नहीं था। यहां से उन्हें खुद का टीचिंग प्लेटफॉर्म बनाने का आइडिया आया। उन्होंने तीन दिन एक साथ बैठकर एक वेबसाइट बनाई, जिससे वे अपना यह कोर्स लोगों तक पहुंचा सकें। धीरे-धीरे उनके प्लेटफॉर्म से लोग जुड़ने लगे। साल 2013 में एक प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म चल निकला।

दो-तीन हफ्ते में उनके कोर्स से 10 छात्र जुड़ चुके थे और एक कर्मचारी की नियुक्ति हो चुकी थी। दोस्त सह-संस्थापक बन गए और ग्राहक स्टार्टअप में निवेश
करने लगे।

निवेशकों ने उनके स्टार्टअप में रुचि दिखाई और अच्छा-खासा निवेश का बंदोबस्त हो गया। दो साल के अंदर उनके प्लेटफॉर्म से पांच हजार से ज्यादा शिक्षक 12 हजार से ज्यादा कोर्सेज के जरिये 7 लाख छात्रों को पढ़ा रहे थे। साल 2015 में उन्होंने कंपनी का नाम बदल कर ‘टीचेबल’ कर दिया। आज उडेमी जैसे कई ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म उनके प्रतियोगी हैं।

गुरु मंत्र : हम कभी ना कभी  ऐसी स्थिति में होते हैं, जब तय नहीं कर पाते कि करना क्या चाहते हैं। ऐसे में हमें अपने हुनर से कुछ नया करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।