कोचिंग सेंटरों के भरोसे प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेज

उज्जैन। 12वीं का रिजल्ट आने के पहले शहर में प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों ने दलाली का नया फार्मूला ईजाद किया है। शहर में कोचिंग सेंटर और बड़े पैमाने पर ट्यूशन पढ़ाने वालों को अपने कॉलेज बुलाकर उनकी आवभगत की जा रही है। इस दौरान कॉलेज से जुड़े लोगों ने कोचिंग सेंटर संचालकों को शानदार पार्टी के साथ कमीशन और अन्य प्रलोभन भी दिये ताकि वे कोचिंग पर पढऩे आने वाले बच्चों को उनके कॉलेज में एडमिशन के लिये प्रेरित करें। ऐसा ही एक मामला हाल ही में शहर के एक प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेज का सामने आया है।

शासकीय या प्रायवेट स्कूल में पढऩे वाले 12 वीं के विद्यार्थी परिजनों के मार्गदर्शन या दोस्तों की रायशुमारी के बाद कोचिंग सेंटर या ट्यूशन पढऩे जाते हैं खासकर मैथ्स, साइंस के विद्यार्थियों की संख्या इनमें अधिक होती है। कोचिंग सेंटर संचालकों ने वर्ष भर की फीस का आकर्षक चार्ट तैयार किया हुआ है एक मुश्त फीस भरने पर विद्यार्थियों को ऑफर भी दिये जाते हैं नहीं तो दो या तीन स्टालमेंट में फीस जमा कराई जाती है। वर्ष भर कोचिंग पर पढऩे वाले विद्यार्थी ट्यूटर से घुलमिल जाते हैं और पास होने के बाद उन्हीं से आगे की पढ़ाई, कॉलेज आदि के बारे में रायशुमारी भी करते हैं।

यही कारण रहा कि कोचिंग सेंटर संचालकों और शहर के प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों के बीच सांठगांठ होना लाजमी है। इंजीनियरिंग कॉलेज के संचालकों ने 12वीं का रिजल्ट आने के पहले बड़ी होटल या स्वयं के कॉलेज कैम्पस में संचालकों के लिए पार्टी का आयोजन किया। इसमें शहर के नामी कोचिंग सेंटरों के संचालक भी शामिल हुए। सूत्र बताते हैं कि इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों की कोचिंग सेंटर संचालकों से बड़े स्तर पर सेटिंग हुई है कि कोचिंग में 12वीं पास कर चुके बच्चों को निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन के लिये प्रेरित करें और उनके परिजनों का भी इन्हीं कॉलेजों की अच्छाई गिनाकर एडमिशन के लिये तैयार किया जाये।

प्रति विद्यार्थी पर मिलेगा कमीशन
सूत्र बताते हैं एक कोचिंग से एक विद्यार्थी निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेता है तो उस विद्यार्थी के मान से कमीशन कोचिंग संचालक को दिया जायेगा। ऐसा ही ऑफर ट्यूशन पढ़ाने वालों को भी दिया है। अब कोचिंग सेंटर के संचालक कमीशन के लालच में प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों की दलाली में भी कमाई के चक्कर में लग चुके हैं।

शिक्षा को बना दिया व्यापार
बदलते समय के साथ शिक्षा का स्तर तेजी से ऊपर बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से शिक्षा का व्यवसायीकरण भी कर दिया गया है। शिक्षा विभाग या प्रशासन के किसी भी अधिकारी को इस बात से कोई सरोकार नहीं कि विद्यार्थियों को शिक्षक सामान की तरह उपयोग कर रहे हैं और विद्यार्थियों के परिजनों की जेब पर सीधे तौर पर डाका डाला जा रहा है। 12वीं पास कर चुके विद्यार्थी अपने शिक्षक से आगे की पढ़ाई के लिये मार्गदर्शन लेने जाते हैं लेकिन विद्यार्थी को यह नहीं पता होता कि शिक्षक के लिये वह सामान के सिवा कुछ नहीं। वर्षभर कोचिंग के नाम पर मनमानी फीस वसूलने के बाद कॉलेज में एडमिशन का मार्गदर्शन देकर भी वह विद्यार्थी के नाम पर कॉलेज संचालकों से हजारों रुपये का कमीशन कमाने में लगा हुआ है।