गुस्सा आए तो एक्ट करें-रिएक्ट ना करें

उज्जैन। क्रोध कभी बूढ़ा नहीं होता, क्रोध नर्क है, क्रोध अछूत है। क्रोध अंदर ही अंदर सुलगता है। क्रोध कुछ पल का पागलपन हैं। क्रोध से तनाव उत्पन्न होता है जिससे एकाग्रता समाप्त होती है। अगर त्याग करना हो तो क्रोध का करें वहीं सबसे बड़ा त्याग है। यह बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि वेदनगर द्वारा तनाव मुक्त जीवन एव राजयोग मेडिटेशन से व्यक्तित्व निर्माण के दूसरे दिन क्रोध प्रबंधन पर ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने कही। उन्होंने आए क्रोध आए तो कम से कम २० सेकंड कुछ ना बोलें, पानी पिएं, खेलने या किसी अन्य कार्य में मन को व्यस्त करें, योगाभ्यास करें, एक्ट करें-रिएक्ट ना करें, क्षमाभाव धारण करें, अपने को बदलने का लक्ष्य रखें। शिविर का समापन १० जून को होगा। शिविर का समय सुबह ७ से ८.३० बजे तक एवं शाम ७.३० से ८.३० बजे तक है।