चाहिए भोले का आशीर्वाद तो शिवरात्रि को करें ये उपाय

देवाधिदेव महादेव जिन के आशीर्वाद से हर असंभव काम संभव हो जाता है। साधु-संयासी हो या फिर कोई भी आमजन, हर किसी को बाबा भोलेनाथ की पूजा से लाभ मिलता है। लेकिन अगर बाबा की विशेष कृपा चाहिए तो आने वाली इस महाशिवरात्रि पर आप नीचे बताए गए उपायों को अपनाएं।

ये कुछ साधारण से उपाय आपकी जिंदगी में खुशियों का भंडार ला सकते हैं। शिव की पूजा किस तरह करें कि उनकी कृपा पूरी तरह से प्राप्त हो, यह काशी के विद्वान बता रहे हैं।वैसे तो शिवरात्रि हर महीने पड़ती है, लेकिन माघ महीने के कृष्णपक्ष त्रयोदशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। इस बारे में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यासी और धर्माचार्य पंडित प्रसाद दीक्षित ने बताया कि इस साल लोगों को महाशिवरात्रि को लेकर संशय है कि ये पर्व 13 को मनेगा या 14 फरवरी को लेकिन महाशिवरात्रि 13 फरवरी को ही मनाई जाएगी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी ये महापर्व 13 फरवरी को ही मनाया जाएगा।

मानें तो 13 फरवरी को माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि रात्रि 12 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर दूसरे दिन रविवार 14 फरवरी रात दो बजकर 43 मिनट तक रहेगी लेकिन शिवरात्रि का महत्व रात्रि में ही माना जाता है। इस वक़्त निशीथ काल मे भगवान शिव का पूजन विशेष फलदाई होता है। यह योग 13 फरवरी की रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से रात्रि के ही 12 बजकर 58 मिनट तक होगा, जिसमें शिव पूजन औऱ जागरण विशेष फल देगा। चूंकि त्रयोदशी तिथि 13 फरवरी को रात्रि भर मिल रही है, इसलिए शिवरात्रि का मान भी 13 को ही होगा न कि 14 फरवरी को।

मंदिर के न्यासी की माने तो शिवरात्रि का अर्थ है वह रात्रि जिसका शिव तत्व के साथ घनिष्ठ संबंध है। यह पर्व तंत्र साधना के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पर्व में रात्रि के वक़्त शिवार्चन और जागरण ही विशेष महत्ता है। इसलिए शास्त्रों में इस दिन सारी रात भगवान शिव की पूजा का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक, धार्मिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि मकर संक्रांति से देवताओं का उदय काल माना जाता है। इसके ठीक बाद महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के निमित्त दिए गए धार्मिक पूजा-पाठ से एक ओर जहां आध्यात्मिक लाभ मिलता है। वहीं दूसरी ओर मरणोपरांत शिवलोक की प्राप्ति होती है।

ये है पूजन का विधान
आज के दिन दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक अतिरुद्र एवं महारुद्र करने का विधान है। जो लोग यह नहीं कर सकते, वे भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जप करें। पंडित जी की माने तो शिवरात्रि पर जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर, भांग, धतूरा आदि से भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए। इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर या एक-एक चीज शिवलिंग पर चढ़ाकर शिवपूजन करें।

शिवपुराण में बताया गया है कि इन चीजों से शिवलिंग को स्नान कराने पर सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा शिवरात्रि पर चार प्रहर का पूजन बहुत लाभ देता है। चार पहर में रात्रि, सुबह, दोपहर और शाम को शिवार्चन के साथ शिव के चारों प्रहर के चार अलग-अलग श्रृंगार का विधान है। पंडित जी की माने तो इस दिन हर शिवलिंग जागृत होता है इसलिए अगर किसी द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं तो घर के आसपास किसी भी शिवमंदिर में दर्शन पूजन से वही फल मिलेगा, जो किसी ज्योतिर्लिंग के दर्शन से मिलता है।

ये न करें शिवरात्रि पर
वैसे तो हर कोई शिवरात्रि के मौके पर यह बताता है कि क्या करने से आपको भोलेनाथ का आशीर्वाद मिलेगा, लेकिन यह भी जानना जरूरी है कि इस दिन किन चीजों से बचना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। पंडित प्रसाद दीक्षित के मुताबिक शिवरात्रि के दिन पूजा पाठ में कई चीजों को नहीं शामिल करना चाहिए जैसे फूल।

शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं। शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है। इसके अलावा कुमकुम या रोली, शंख, नारियल पानी, तुलसी का पत्ता भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए।