चिंता करने से समस्या हल नहीं होती बल्कि समय बर्बाद होता है

एक बार की बात है, किसी गांव के बाहर एक प्रसिद्ध साधु ने डेरा जमाया था। गांव के लोग उनसे काफी प्रभावित हुए और अपनी समस्या को लेकर उनके पास गए। साधु ने देखा कि लोग एक समस्या को लेकर बार-बार उनके पास आ रहे हैं। इस साधु ने एक दिन अपने पास आए लोगों को एक चुटकुला सुनाया।

लोगों को यह चुटकुला इतना अच्छा लगा कि सभी ठहाका मारकर हंसने लगे। कुछ मिनट बाद साधु ने वही चुटकुला फिर सुनाया तो इस बार लोग जोर से नहीं हंसे, बल्कि कुछ लोग थोड़ा मुस्कुराए। कुछ मिनट के लिए साधु रुके और वही चुटकुला लोगों को फिर सुनाया तो इस बार कोई भी नहीं हंसा।

अब साधु मुस्कुराए और बोले – जब आप लोग एक चुटकुले पर बार-बार नहीं हंस सकते तो एक ही समस्या को लेकर बार-बार रोते क्यों रहते हो?”

कहानी का सार : चिंता करने से कोई भी समस्या हल नहीं होती। बल्कि इससे समय और ऊर्जा की बर्बादी होती है।