चित्त को साध लेना ही ईश्वर प्राप्ति

उज्जैन। पारमार्थिक चितन जीवन को शांति प्रदान करता है, गायन, वादन, नृत्य मन को शांत करते हैं इसलिए कृष्ण ने रास का प्रादुर्भाव किया, नृत्य से आराधना गीता में सबसे ज्यादा मन पर किया है। चित्त को साध लेना ही ईश्वर प्राप्ति है। यह बात महाकाल प्रवचन हॉल में आयोजित भागवत कथा में उत्तम स्वामी महाराज ने कही। कथा में गुरुवार को रुक्मिणी विवाह हुआ। समापन पर महाआरती विधायक पारस जैन, पूर्व सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय, विधायक अरुण भीमावद शाजापुर, ओम जैन, राम भागवत, शैलेंद्र शर्मा, राकेश शर्मा, राजकुमारी ठाकुर, शीतल भागवत ने की।