चित्रकला के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध कर रहे हैं वरिष्ठ चित्रकार जै

उज्जैन। भोपाल के वरिष्ठ चित्रकार शील चंद्र जैन के 90वें जन्म दिवस के अवसर पर स्वराज कला वीथि रवींद्र भवन परिसर भोपाल में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।  प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में सुधिजन रवींद्र भवन परिसर पहुंचे।
पन्ना जिले के ग्राम पवई में 28 दिसंबर 1928 को जन्मे श्री जैन की शिक्षा बुढ़ार शहडोल एवं रीवा में हुई। अध्ययन करने के बाद उन्होंने लखनऊ स्कूल ऑफ आर्ट से फाइन आर्ट में पत्रोपाधि प्राप्त की। वहीं भातखंडे संगीत महाविद्यालय लखनऊ से वायलिन में संगीत विशारद, एमए इन फाइन आर्ट (विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन) डिप्लोमा इन फोटोग्राफी (बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल) तथा आर्ट रिफ्रेशर कोर्स (सीआईई नईदिल्ली) से डिग्री प्राप्त की।

श्री जैन को विंध्य प्रदेश शासन एवं शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा अन्य संस्थाओं एवं संगठनों द्वारा भी उन्हें समय-समय पर सम्मानित किया गया।

जिनमें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू, हंसराज महिला महाविद्यालय जालंधर, शारदाबाई पवार महिला महाविद्यालय बारामती, महाराष्ट्र संस्कार भारती, मध्य प्रदेश विद्या भारती जन जागृति मंच भोपाल, वैदिक कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय जयपुर, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन उदयपुर, राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन बीजापुर, जवाहर शिक्षा मंडल कानोड राजस्थान शामिल है।

समूह प्रदर्शनी
श्री जैन की समूह प्रदर्शनी अभी तक लखनऊ मैसूर एवं गवालियर में लगाई जा चुकी है जबकि एकल प्रदर्शनी माउंट आबू जोधपुर, बीकानेर, लाडनू, जैसलमेर, जालंधर, कपूरथला, ग्वालियर, बारामती, मथुरा, जयपुर, औरंगाबाद, उदयपुर, कानोड, बीजापुर, रीवा, जबलपुर, टीकमगढ़, कुंडेश्वर, भोपाल, विदिशा, नागपुर, बीना, सतना, बुढ़ार आदि में आयोजित की जा चुकी हैं।

शिक्षित करना उद्देश्य
श्री जैन का कहना है कि मेरी कला यात्रा एक शैक्षिक एवं व्यावसायिक कला आंदोलन है। इसका प्रमुख उद्देश्य समाज में कलाओं के प्रति आपकी रुचि जागृत करना है। साथ ही भारतीय सांस्कृतिक जनजीवन पर मंडरा रहे विनाश के हालातों से रक्षा करना, अपने परिवेश को अपनी वैभवशाली सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध कराना और ललित कलाओं से आत्मसात कराना है। कला प्रदर्शनी के आयोजन का उद्देश्य मात्र मनोरंजन करना, नहीं बल्कि समाज को सांस्कृतिक रूप से शिक्षित करना है।

चित्रों के विषय सुंदर
पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय जयपुर राजस्थान का कहना है कि श्री जैन ने जो चित्र बनाएं हैं। वह रसात्मक और आकर्षक हैं। चित्रों के विषय भी सुंदर हैं, शील चंद्र कवि भी है, संगीतकार भी हैं, चित्रकार तो माने हुए हैं मेरी शुभकामनाएं की शील जी अपनी कृतियों से कला का कोष भरते रहें।