चुनावी चर्चा :कांग्रेस नहीं कर पा रही है उपचार

उज्जैन। कांग्रेस उज्जैन में बगावत की आग नहीं बुझा पा रहे हैं। जिन नेताओं को बागियों से सुलह करने की जबाबदारी दी गई, उनमें से कुछ तो आग लगाने में शामिल माने जा रहे है। अब कांग्रेस को दिग्विजय, सिंधिया, कमलनाथ का इंतजार है। चर्चा है कि दक्षिण के दरबार को माया (पिछला हिसाब किताब) और उत्तर की माया को दरबार (विधानसभा) नजर आ रही है। समझौते का सारा गणित इसी समीकरण में उलझा है।

दोनों बागियों को मनाने की कवायद निरंतर चल रही है, बागी फोन नहीं उठा रहे है। जो सामने आ रहा है, उसे खरी-खरी सुना रहे हैं। अन्य दावेदार जिन्हें टिकट नहीं मिला है वे आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले चुनाव में दरबार कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी थे उनके साथ जमकर सेबोटेज हुआ, लिहाज़ा उनकी हार हो गई। उत्तर में भी कांग्रेस प्रत्याशी विवेक यादव को खूब बत्ती दी गई।

अब दरबार अपना बदला लेने के मूड में है। पर कांग्रेस आलाकमान की सख्ती के कारण मान सकते हैं। आलाकमान की सख्ती का शिकार उनके नेता हो चुके है।उत्तर में माया को ब्राह्मण वचन की लाज रखना हैं। इसलिए उनके तेवर कड़े हैं।बहरहाल बगावत की आग को ठंडा करने के लिए प्रयास जारी है। देखना है कौन माया को चुनता है और कौन दरबार के लिए खड़ा रहता है।

@प्रकाश त्रिवेदी