चुनाव: सांवेर विधानसभा ही ऐसी है, जहां दोहरीकरण को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई

मतदाता सूची पर फिर उठ रहे सवाल, दो लाख से अधिक मतदाताओं के नाम दो जगह दर्ज

विधानसभा चुनाव को हुए चंद माह ही बीते हैं और घर-घर अभियान के दौरान जांच कर तैयार की गई शुद्ध मतदाता सूची पर फिर सवाल उठ रहे हैं। शुद्ध मतदाता सूची से विधानसभा चुनाव का दावा करने वाले जिला निर्वाचन कार्यालय के सामने जब हाल ही में नई शिकायत सामने आई कि दो लाख से अधिक मतदाताओं के नाम और पते एक समान हैं तो उनकी नींद उड़ गई।

शिकायतकर्ता ने नामों के संबंध में पूरी जानकारी जुटाकर सीडी और सूची उपलब्ध कराई है। सबसे अधिक दोहरीकरण के नाम देपालपुर में मिले हैं। वहीं निर्वाचन कार्यालय ने भी दोहरीकरण के नाम आने की बात स्वीकार की है।

शिकायत के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय ने सभी विधानसभा क्षेत्र के रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को नाम दोहरीकरण की जांच करने के निर्देश दिए हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने लाखों नाम के दाहरीकरण को लेकर शिकायत की थी।

आयोग ने इन नामों की जांच करने के निर्देश दिए। उसके बाद बीएलओ घर-घर गए और नामों की जांच करने के बाद नए नाम जोड़े और नाम कम करने का काम किया। इस शिकायत में मात्र सांवेर विधानसभा ही ऐसी है, जहां दोहरीकरण को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई है।

शिकायतकर्ता ने सबसे अधिक नाम देपालपुर विधानसभा में दोहरीकरण के बताएं, जिसके अनुसार यहां 66826 लोगों के नाम दोहरीकरण में हैं। इसी तरह क्षेत्र क्रमांक-1 में 33236, क्षेत्र क्रमांक-2 में 42432, क्षेत्र क्रमांक-3 में 2119, क्षेत्र क्रमांक-4 में 4578, क्षेत्र-5 में 44365, विधानसभा महू में 45275 और राऊ विधानसभा में 38503 नाम को लेकर शिकायत आई है।

अधिकारियों ने शिकायत के अनुसार परीक्षण कर मिलान करना शुरू कर दिया है। इसी तरह अधिकारियों को अभी तक यह एप डाउनलोड भी नहीं कराया जा सका है। आयोग के निर्देश को ताक में रखकर मर्जी से इस तरह की स्पर्धा कर किस तरह से सिविल का प्रचार कर रहे हैं।

सरकारी कार्यालयों में प्रचार-प्रसार करने और वाहनों पर स्टीकर लगाने के निर्देश भी कागजों पर ही सिमटे हुए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय और अधिकारी के साथ ही जिला पंचायत कार्यालय व सीईओ के वाहन पर भी इस तरह के स्टीकर दिखाई नहीं दे रहे हैं।

अधिकारियों को तीन फीसदी ही मिला सही

जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार बताया जाता है कि शिकायत के आधार पर मिलान करने में मात्र 3 फीसदी (6500) दोहरीकरण सही मिले हैं। सीडी के अनुसार अधिकारी प्रत्येक भाग संख्या में नाम, लिंग, उम्र और फोटो को लेकर मिलान करवा रहे हैं।

कई जगह एक समान नाम व उम्र के लोग सामने आ रहे हैं, लेकिन वे अलग-अलग व्यक्ति हैं। अधिकारी इन नामों का मौके पर जाकर मिलान करवाकर देख रहे हैं कि व्यक्ति एक ही है या अलग। मिलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

सीविजिल का काम शुरू नहीं हुआ

लोकसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग में चल रही हलचल से रविवार से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आयोग ने आचार संहिता लागू होने से पहले चुनाव के दौरान की जाने वाली शिकायतों को लेकर जारी किए सीविजिल एप के लिए जो निर्देश दिए थे उनका पालन जिले में नहीं हो रहा है। जिले में सीविजिल एप को लेकर न तो सेल्फी प्वाइंट बनाए और न ही स्टीकर या कार्टून नजर आ रहे हैं।