छोटी-छोटी बातें भी बहुत बड़ा असर छोड़ जाती हैं

महक अपने कॉलेज की तरफ से एक गरीब बस्ती में घूमने गई थी। वह और उसके दोस्त बस्ती की तंग गलियों में रहने वालों के जीवन का सर्वेक्षण कर रहे थे। उस बस्ती के कुछ लोग सबके लिए अपने दिल और घर के दरवाजे खुले रखते थे। लेकिन कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने खुद को बाहर की दुनिया से एकदम बंद कर रखा था। जब बस्ती के दूसरे लोगों को मदद मिलती और उनको नहीं मिलती, तो वे नाराज होकर सभी को कोसने लगते थे। उस बस्ती में महक की मुलाकात एक ऐसे ही शख्स से हुई। हुआ यों कि महक एक गली से गुजर रही थी कि उसका पैर फिसला और वह पूरी तरह कीचड़ में सराबोर हो गई।

 वहीं सामने एक घर था। महक ने जब कीचड़ साफ करने के लिए उस घर का दरवाजा खटखटाया, तो दरवाजा खोलने वाले व्यक्ति ने महक को देखकर कहा, तुम चाहती हो कि मैं पहले तुम्हारा कीचड़ साफ करवाऊं, और फिर तुम दूसरे लोगों के पास जाकर उनकी मदद करो। महक समझ गई कि उस शख्स को क्या दिक्कत है। वह चुपचाप वहां से चली गई, दूसरे किसी के घर में कीचड़ साफ कर वापस उस शख्स के घर के सामने पहुंच गई, जहां उसका पैर फिसला था। उसने देखा कि वह जगह काफी फिसलन वाली और अंधेरी है और रोज आते-जाते कई लोग वहां फिसल जाते हैं।

महक ने वहां रोशनी की व्यवस्था की और बोर्ड लगवा दिया, जिसमें लिखा था कि यहां संभल कर चलें। मुझे जिसने फिसलने से बचाया, वह सामने के घर में रहता है। अगर आप भी फिसलने से बचे हों, तो सामने के घर में धन्यवाद जरूर कहें। बस फिर क्या था, रोज उधर से गुजरने वाले लोग उस शख्स का धन्यवाद करने लगे वह शख्स रातों-रात बस्ती में मशहूर हो गया और लोग उसे बहुत इज्जत देने लगे। अब उस व्यक्ति को यह अच्छे से समझ में आ गया कि एक-दूसरे की मदद करने से जिंदगी कितनी खूबसूरत बन जाती है।