छोटे भाई ने ही रची थी बड़े भाई की हत्या की साजिश

इंदौर। पीथमपुर में गत दिनों हुई हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। हत्यारा और कोई नहीं बल्कि मृतक का छोटा भाई ही निकला, जिसने अपने बड़े भाई को मरवाने के लिए सौदा किया था।
बीते शनिवार को दिलीप पिता मांगीलाल चौहान राजपूत (33) निवासी पिपल्या थाना सागोर उसके दोस्त मनोज पिता दयाराम डोडिया जाति खारोल (35) निवासी कुँवरसी थाना सागोर अपनी मोटर सायकल क्रमाक एमपी09 एफ 6241 पल्सर से पेषी हेतु धार न्यायालय जा रहे थे।पेषी के बाद दिलीप व मनोज मोटर सायकल से वापस अपने घर के लिए करीब सवा चार बजे निकले।मो.सा.मनोज चला रहा था।पीछे दिलीप बेठा हुआ था।करीब शाम पोने पांच बजे भगवती ढाबा उटावद के आगे एक मो.सा.से अज्ञात तीन लडके जिनकी उम्र 30 से 35 वर्ष थी हाथ में लकडी व कुल्हाडी लेकर ओवरटेक करके एक लडका मो.सा.से उतरा और उन्हे मारने दौडा तो मनोज ने अपनी मोटर सायकल धार रोड पर मोड ली।धार तरफ से एक गाडी पर तीन लडके आए।उसमें एक के हाथ में लोहे का सब्बल रखा हुआ था।

उसने चलती मोटर सायकल पर जान से मारने की नीयत से मनोज को सामनें से सब्बल मारी जो मनोज के दाहिनं तरफ सीने में सब्बल धंस गबया।जिससे उसकी मौके पर ही मौत गई।फरियादी दिलीप ने थाने में आकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शक के आधार पर संदेहियो को उठाया व कडी पुछताछ की।पुछताछ में संदेहियो ने अपना गुनाह कबुल लिया।आरापीयो ने बताया की धर्मंद्र की पत्नी के साथ दिलीप पिता मांगीलाल राजपुत निवासी पिपल्या द्वारा छेंडछाड की थी,जिसका प्रकरण न्यायालय में धार में चल रहा था।

छेडछाड के प्रकरण के आरोपी दिलीप पिता मांगीलाल को निपटाने के लिए उसके छोटे भाई बलराम द्वारा आज से करीब 3-4 माह पहले उसके दूर के रिष्तेदार विक्रम पिता केषरसिंह दांगी निवासी ऊटावद से सुपारी की बात हुई थी,जिसमें 2 लाख रूपए में सौदा तय हुआ था।इस प्रकार विक्रम ने फरियादी दिलीप को रास्ते से हटाने के लिए अपने साथी प्रेमसिंह बंजारा निवासी ऊटावद,इंदरसिंह राजपुत निवासी ऊटावद,तथा संदीप कंजर निवासी बस स्टेण्ड धार को शामिल किया था।इन चारो द्वारा फरियादी को मारने की योजना बनाई थी।इस प्रकार विक्रम की बलराम से बात होने के बाद उसके करीब एक ह ते बाद बलराम ऊटावद आया और सुपारी के 80 हजार रूपए विक्रम को एडवांस दिए।शेष रकम काम होने के बाद देना तय हुई थी,एडवांस में मिले रूपए को चारो ने 20-20 हजार रूपए में बाट लिए थे।इस प्रकार फरियादी दिलीप को एक,दो बार मारने के प्रयास किए लेकिन मौका नही मिल पाया।

लेकिन दिनांक 3-2-18 शनिवार को आरोपी इंदरसिंह को फरियादी दिलीप तथा उसके साथी की कोर्ट पेशी धार में आने की सूचना मिलने पर आरोपी लोग कोर्ट पहुचे। कोर्ट पेषी के बाद उसका पीछा कर ऊटावद भगवती ढाबे के बागे मो.सा ओवरटेक करके रोकी तो दिलीप ने गाडी ऊटावद तरफ दौडा दी,इतने में साने से दिलीप व इंदर आ गए,जिंहोने गाडी रोककर इंदर ने लोहे की टामी मोटर सायकल चालक को सीने में मार दी,जिससे उसकी मृत्यु हो गई।