जानिए वह 4 कारण जिनकी वजह से बच्चों के लिए दादा-दादी हैं जरूरी

छोटे बच्चों के लिए दादा-दादी बेहद जरूरी होते हैं। जो बच्चे अपने दादा-दादी के पास रहते हैं , वह अन्य बच्चों से ज्यादा खुश और स्वस्थ रहते हैं। दादा-दादी अपने बच्चों को हर तरह से आगे बढ़ने में मदद करते हैं। केवल दादा-दादी ही ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने बच्चों को पुराने संस्कृति , मान्यता , परंपरा से जोड़ सकते हैं। दादा-दादी अपने बच्चों में अच्छी आदतों के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। बच्चे उन्ही के द्वारा ही नैतिक गुणों को जानते हैं और यह भी समझते हैं कि नैतिक गुणों की जिंदगी में कितनी अहमियत होती है। इसके अलावा भी दादा-दादी से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आइए जानते हैं कौन-सी हैं वह कारण जिनकी वजह से बच्चों के लिए दादा-दादी जरूरी होते हैं।

अपनी संस्कृति , मान्यता , परंपरा से जुड़े रहते हैं
जो बच्चे अपने दादा-दादी के साथ रहते हैं , वह अपने पूरे परिवार यहां तक की दादा-दादी के रिश्तेदारों को भी जान जाते हैं। दादा-दादी अपने बच्चों को पुराने संस्कृति , मान्यता , परंपरा से जोड़ सकते हैं। बच्चे अपने दादा-दादी से ही अपनी जड़ों के बारे में जानते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं दादा-दादी अपने बच्चों को अपने सघंर्ष के बारे में बताते हैं। जिससे बच्चों में हर मुसीबत से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है।

नैतिक गुण विकसित होते हैं
हर मां-बाप की एक इच्छा होती है कि उनके बच्चे में नैतिक गुण जरूर हो। यह नैतिक गुण ही जीवन को जीने का तरीका बदल देती है। इसलिए नैतिक शिक्षा के लिए दादा-दादी एक अच्छा विकल्प है। दादा-दादी अपने बच्चों को अच्छी-अच्छी कहानियां सुनाकर उनके अंदर नैतिक गुण लाने में बेहद सहायक है। हर बच्चा बड़े बुर्जुगों से कुछ न कुछ जरूर सिखता है।

बच्चे हमेशा खुश रहते हैं
यह पाया गया है कि बच्चों को उनके दादा-दादी के साथ रहना बेहद पंसद होता है। दादा-दादी अपने बच्चों से इतना प्यार करते हैं कि उन्हें कभी प्यार की कमी महसूस ही नहीं होती है और वह हमेशा खुश रहते हैं। दादा-दादी से ही बच्चों को सुरक्षा की भावना का एहसास होता है।

भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं
दादा-दादी द्वारा दिया गया प्यार ही उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है। जब भावनात्मक या व्यवहार संबंधी परेशानियां उनके सामने खड़ी हो जाती है , तो इस स्थिति में वह बेहतर तरीके से समस्या से निपटते हैं। ऐसे बच्चों के अंदर अपने दादा-दादी के प्रति स्नेह और आदर की भावना ज्यादा होती है। जिससे वह भावनात्मक रूप से स्थिर होने लगते हैं और दूसरों की भावनाओं की क्रद करते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि जो बच्चे अपने दादा-दादी के साथ रहते हैं वह अकेलेपन, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से कम पीड़ित होते हैं।