जानें कैसे एक मॉडल से महाराज बने भय्यूजी, मध्यप्रदेश में मिला था कैबिनेट मंत्री का दर्जा

हर किसी शख्स का सपना होता है कि उसके पास दौलत और शोहरत हो लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनका इससे मन ऊब जाता है। ऐसे ही एक शख्स थे भय्यूजी महाराज। मध्य प्रदेश के शुजालपुर में विश्वास राव देशमुख और कुमुदनी देवी देशमुख के घर जन्मे उदय सिंह देशमुख को कॉरपोरेट जगत और मॉडलिंग की दुनिया रास नहीं आई। उन्होंने चकाचौंध की दुनिया को छोड़कर समाज सुधारने का अभियान छेड़ा था। इसी वजह से समाज ने उन्हें भय्यू जी महाराज का नाम दिया था।

सुगठित शरीर वाले भय्यूजी भारत के संत महात्माओं से एकदम अलग थे। उनका पहनावा एक आम आदमी जैसा रहता था। वह कुर्ता पायजामा पहनते और माथे पर छोटा सा चंदन का टीका लगाया करते थे। उन्होंने अपने एक हाथ में मोतियों से जड़ा सोने का ब्रेसलेट तो दूसरे हाथ में सूत का कलावा पहना रहता था। वह घुड़सवारी भी करते थे और तलवारबाजी के हुनर में भी माहिर थे। वह अन्ना हजारे के करीबी थे। अन्ना उनके सामाजिक कार्यों से काफी प्रभावित रहे थे।

पढ़ाई पूरी करने के बाद भय्यूजी ने मुंबई की एक कंपनी में अधिकारी के पद की जिम्मेदारी संभाली थी। केवल इतना ही नहीं उन्हें सियाराम फैब्रिक्स में मॉडलिंग करने का भी मौका मिला था। मगर ग्लैमर वाली यह दुनिया उन्हें ज्यादा दिन तक रास नहीं आई। जिसके बाद उन्होंने समाज के उपेक्षित और कमजोर वर्ग के लोगों की चतरफ रुख किया। उन्हें मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। हालांकि, भैय्यूजी ने मंत्री पद को लेने से इनकार कर दिया था.

भय्यूजी महाराज गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी संत वाली जिंदगी जीते हैं। उनकी एक बेटी है जिसका नाम कुहू है। उन्होंने पिछले साल ही दूसरी शादी की थी। उस समय भैय्यूजी के शादी के फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया था। उस समय करीबी लोगों ने बताया था कि पहली पत्नी की मौत के बाद भैय्यूजी महाराज काफी अकेला महसूस कर रहे थे।

वह एक ऐसे संत थे जो लोगों को ट्रैक सूट के अलावा पैंट-शर्ट में भी मिल जाया करते थे। वह एक किसान की तरह अपने खेतों को जोतते थे तो दूसरी तरफ उम्दा क्रिकेट भी खेला करते थे। महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा मिला हुआ था। पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे विलासराव देशमुख के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं।

भय्यूजी का प्रभाव हर पार्टी पर रहा है। उनके ससुर जहां महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत से लेकर नितिन गडकरी तक उनके भक्तों की सूची में शामिल रहे हैं। वह पद, पुरस्कार, शिष्य और मठ के विरोधी थे। व्यक्तिपूजा को भी वह अपराध की श्रेणी में मानते थे। उन्होंने समाजसेवा के कई बड़े काम किए थे जिनमें महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंडारपुर में रहने वाली वेश्याओं के 51 बच्चों को उन्होंने पिता के रूप में अपना नाम देना भी शामिल है।