जिसने मन को शांत किया वही सफल मनुष्य

भगवान की कितनी ही पूजा अर्चना कर लो लेकिन मन में राग, द्वेष, क्रोध के भाव हैं तो सब निरर्थक है। जीते जी जिसने मन को शांत कर लिया वही सफल मनुष्य होता है। वरना मरने के बाद तो हर व्यक्ति शांत हो जाता है। स्वर्गीय होने से पहले स्वर्ग का सुख यदि भोगना है तो मन के विचारों की शुद्धि कर लेना चाहिये।

यह बात फ्रीगंज स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में हुई धर्मसभा में आचार्यश्री कुशाग्र नंदी महाराज ने कही। इससे पूर्व आचार्यश्री संघस्थ भट्टारक अजय ऋषि ने कहा संत अपने आप में जागृत परमात्मा के समान होता है। उनके द्वारा दिये गये उपदेश और मार्गदर्शन से प्रेरणा लेकर मनुष्य अपना जीवन श्रेष्ठ बना सकता है। शनिवार सुबह आचार्यश्री कुशाग्र नंदी एवं अजय ऋषि महाराज का मंगल प्रवेश हुआ।

इस अवसर पर समाजजों ने अगवानी की। धर्मसभा का शुभारंभ श्री पाश्र्वनाथ भगवान के चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंगलाचरण सपना जैन ने प्रस्तुत किया। आचार्यश्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य हीरालाल बिलाला, भरत पांड्या, राजेन्द्र सोनी एवं संजीव गंगवाल ने प्राप्त किया। इस मौके पर नरेंद्र बडज़ात्या, नितिन डोसी, संजय जैन, प्रकाश कासलीवाल, सुनीत छाबड़ा, नरेंद्र डोसी, कमल सेठी, शैलेंद्र जैन, अनिल गंगवाल आदि उपस्थित थे।

पूज्य आचार्यश्री का प्रवास फ्रीगंज स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में है जहां प्रतिदिन प्रात: 8.30 बजे से प्रवचन, दोपहर 3.30 बजे धर्मचर्चा तथा शाम 6.30 बजे से आचार्य भक्ति के कार्यक्रम होंगे।