जीवन में आगे बढ़ना है तो क्रोध को कमजोरी नहीं ताकत बनाओ

एक दिन एक व्यक्ति बहुत निराश था। दरअसल उसे अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं था जिसके कारण उसका कोई दोस्त नहीं रह गया था।

एक दिन उसने अपने पिता से यह बात कही। उसके पिता ने उसकी बात सुनी और उसे ढ़ेर सारी कीलें दीं। उसके पिता ने उससे यह भी कहा कि उसे जब भी गुस्सा आए तो एक कील पेड़ पर ठोक देना। बेटे को जब भी गुस्सा आता वो पेड़ पर कील ठोक देता। इस तरह उसने 20-15 कीलें पेड़ पर ठोक दीं। जितनी बार भी वह कीलें ठोकता उसे दुख होता।

धीरे-धीरे वो खुद के गुस्से को कंट्रोल करने लगा और कुछ दिन बाद उसने गुस्सा करना छोड़ दिया। इसके बाद वह अपने पिता के पास गया। जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे कहा कि वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे। लड़के ने बड़ी मेहनत करके जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं।

इसके बाद पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास लेकर गए। उन्होंने बेटे को समझाया, तुम्हारे गुस्से के कारण पेड़ के तने पर सैकडों कीलों के निशान बन गए। इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे, जब तुम गुस्सा करते थे। इसलिए गुस्से को छोड़कर हमें इसे अपनी ताकत बनाना चाहिए।