जो आज को पूरी तरह से जिएगा, वही सफलता प्राप्त कर सकेगा

तेजस एक सफल उद्यमी बन गया था। उसकी ऊर्जा और हंसमुख प्रवृत्ति से पूरा ऑफिस प्रभावित था। एक दिन एक मैनेजर ने तेजस से पूछा कि आखिर यह कला उन्होंने कहां से सीखी। तेजस बोला, जब मैं नया-नया इंजीनियर बना था, तब मेरे पास कुछ भी नहीं था, न घर, न गाड़ी, न दोस्त। एक दिन मैं रात में ग्यारह बजे अपने घर लौट रहा था। स्टेशन से घर जाने के लिए मैंने एक ऑटो पकड़ा, जिसमें पहले से चार लोग बैठे हुए थे। मेरा घर स्टेशन से पांच मिनट की दूरी पर था। पर उन पांच मिनटों ने मेरी जिंदगी बदल दी। मैनेजर ने पूछा, वह कैसे?

 

तेजस बोला, उस ऑटो में गुंडे बैठे थे। वे मेरी पिटाई करने लगे। मेरे पास जो भी थोड़ा बहुत पैसा था, वह उन्होंने छीन लिया। वे मेरे हाथ-पैर बांध कर एक तालाब में फेंकने जा रहे थे। मैं सोच रहा था कि अभी अपनी जिंदगी तो मैंने पूरी तरह जी भी नहीं। मैंने अपनी परिवार को कभी नहीं बताया कि मैं उन्हें कितना प्यार करता हूं। मेरे मन में कितनी ही इच्छाएं अभी तक दबी थीं, जो मेरे मर जाने पर हमेशा के लिए दबी रह जातीं। तेजस के साथी ध्यान से कहानी सुन रहे थे।

तेजस बोला, जब उन्होंने मुझे तालाब में फेंका, तो मेरा हाथ वहीं पड़े एक पत्थर पर लगा और मैं उसे पकड़ कर काफी देर तक लटकता रहा। मैं किसी तरह बच तो गया, पर उस दिन से मेरे अंदर काफी कुछ बदल गया। मैं आज भी उस अनुभव को याद करता हूं, तो बस मन में एक ही बात आती है कि अगर आज मैं मर जाऊं, तो क्या खुद को यह कह पाऊंगा कि मैंने अपने समय का भरपूर उपयोग किया है? क्या मेरे अंदर वह संतुष्टि होगी कि मैं जो भी आज तक हासिल करना चाहता था, वह मैंने कर लिया है? यही सोचकर मैं कोई भी काम कल के लिए नहीं छोड़ता।