झमाझम बारिश: हाइड्रोलिक ट्रॉली उठी तो सड़क पर बिखर गया 35 क्विंटल गेहूं

उज्जैन। सुबह 8.३० बजे का समय, ट्रेक्टर में 35 क्विंटल गेहूं भरकर मण्डी जा रहे किसान की छोटी सी गलती, उसका पैर हाइड्रोलिक गैर पर रखा और ट्राली ऊंची उठ गई। उसमें भरा हजारों रुपये का गेहूं चलती ट्राली से सड़क पर लाइन बनाता हुआ बिखरता चला गया।
बारिश में किसान की ट्राली का गेंहू सड़क पर बिखर गया तो वह मायूस हो गया क्योंकि गीला गेहूं मण्डी में बिकने वाला नहीं था, इस दौरान राहगिरों ने मानवता दिखाई और किसी ने फावड़ा तो किसी ने झाडू उठाकर उसका सड़क पर बिखरा गेहूं पुन: ट्राली में भरवाया।

घटना चामुण्डा माता चौराहे के सामने की है। बालकृष्ण निवासी लेकोड़ा अपने ट्रेक्टर-ट्राली में 35 क्विंटल गेहूं भरकर चिमनगंज मण्डी बेचने जा रहा था। इस दौरान तेज बारिश भी हो रही थी। बालकृष्ण अपना ट्रेक्टर लेकर चामुण्डा माता सिग्नल पार कर रहा था उसी दौरान गलती से उसका पैर हाइड्रोलिक गैर पर पड़ा और ट्राली खड़ी हो गई। इसका बालकृष्ण को आभास न हुआ और चलते हुए ट्रेक्टर ट्राली से उसका गेहूं एक लाइन बनाता हुआ सड़क पर बिखर गया।

यह देख बालकृष्ण मायूस होकर ट्रेक्टर में ही बैठा रह गया। बारिश में मदद की आस से वह इधर उधर देख रहा था तभी दो राहगिर युवतियांं रुकीं और बालकृष्ण की मदद के लिये बारिश के दौरान सड़क पर बिखरा गेहूं समेटने लगीं, युवतियों को गेहूं समेटते देख आसपास के लोग भी एकत्रित हो गये और देखते ही देखते करीब आधा दर्जन से अधिक लोगों ने सड़क पर बिखरा गेहूं समेटने में बालकृष्ण की मदद की। किसी ने फावड़ा उठाया तो किसी ने झाडू से सड़क पर बिखरा गेहूं समेटा।

जब बालकृष्ण ने देखी मानवता तो भीग गई आंखें

बालकृष्ण स्वयं का गेहूं लेकर खुद ही ट्रेक्टर ट्राली चलाकर मण्डी में गेहूं बेचने निकला था। उसे रुपयों की आवश्यकता थी और गेहूं बेचना भी जरूरी था लेकिन छोटी सी गलती के कारण उसका पूरा गेहूं सड़क पर बिखरने के बाद बारिश से भीग चुका था। गेहूं समेटने के लिये उसकी मदद को आये लोग बारिश में भीगते रहे लेकिन लोगों की नि:स्वार्थ मदद को देखकर बालकृष्ण की आंखें आंसू से भीग गई।