“तिरंगा बोल उठा” – मंथन में मनाया 69वाँ गणतंत्र दिवस

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का अभावग्रस्त बच्चों को मूल्याधारित शिक्षा प्रदान करता सामाजिक प्रकल्प मंथन – ‘संपूर्ण विकास केन्द्र’ के दिल्ली में स्थित चार केन्द्रों रिठाला, मंगोलपुरी, शुकूरपुर व बादली द्वारा सामूहिक रूप से 28 जनवरी को दिल्ली स्थित रोहिणी के ब्लॉक ए के कम्युनिटी सेंटर पर 69वाँ गणतंत्र दिवस मनाया गया- “तिरंगा बोल उठा” | इस कार्यक्रम को मनाने का उद्देश्य बच्चों में देश प्रेम की भावना को भरना था । कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन द्वारा किया गया । तदन्तर रिठाला केन्द्र के बच्चों द्वारा देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत सामूहिक गीत की प्रस्तुति की गई। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथियों द्वारा इन बच्चों को मंथन स्कूल बैग व् स्टेशनरी वितरित की गयी| मंगोलपुरी के बच्चों ने मैजिक शो द्वारा प्रेरणाप्रद जादू के खेल दिखाए। इसी क्रम में राष्ट्र की आजादी के लिए भारतीय वीरों के बलिदानी को दर्शाता हुआ ‘तिरंगा बोल उठा’ नामक नाट्य प्रस्तुति की गई । यह प्रस्तुति शुकूरपुर केन्द्र के बच्चों द्वारा किया गया ।

इसके अतिरिक्त बादली केन्द्र द्वारा देश की विभिन्न संस्कृतियों को दर्शाता एक सांस्कृतिक नृत्य व मंगोलपुरी केन्द्र द्वारा मंथन जिंगल नृत्य की प्रस्तुति किया गया । इन सभी प्रस्तुतियों का एकमात्र उद्देश्य था कि बच्चों के अंदर देश के प्रति श्रद्धा व प्रेम की भावना को जागरूक किया जा सके । तत्पश्चात आये हुए अतिथियों को मंथन के वार्षिकोत्सव में बच्चों के प्रदर्शन व अब तक की उपलब्धियों पर आधारित लघु विडियो दिखाया गया ।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री योगेन्द्र राना (सोशल वर्कर), डा. वी. के सक्सेना, श्री विनायक हेगड़े जी (सह मंत्री, संस्कृत भारती), डा. विजय जी (प्रचारक प्रमुख, संस्कृत भारती), प्रोफेसर सुभाष आनंद (दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स), श्री सज्जन कुमार शर्मा (समाज सेवी), प्रोफेसर नारद मुनि (गणित डिपार्टमेंट, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी), श्री मुकेश अग्रवाल जी (श्री राम प्रॉपर्टीज, रोहिणी दिल्ली), श्री बिजेंन्द्र पाल ( पाल प्रॉपर्टीज, रोहिणी दिल्ली), श्री राकेश कुकरेती (दून प्रॉपर्टीज, रोहिणी दिल्ली) मौजूद थे। उन लोगों ने सर्वप्रथम बच्चों को गणतंत्र दिवस की अनंत शुभकामनायें दी। तदन्तर उनके विविध प्रस्तुतियों की सराहना की तथा अपने ओजस्वी उद्बोधन द्वारा बच्चों को अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम व कर्तव्य का बोध कराते हुए उन्हें अभिप्रेरित भी किया ।

इसके अतिरिक्त बच्चों को उनके स्पोंसर्स से भी मिलवाया गया। उन स्पोंसर्स ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए उनको बैग व पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम के अंत में बच्चों के माता-पिता व बच्चों का  प्रतिसाक्ष्य भी बनाया गया जिसमें उन्होंने अपने बच्चों के विकास में मंथन की पूर्ण भूमिका को प्रकाशित किया ।