तिल चतुर्थी: चिंतामन को लगा सवा लाख लड्डु का भोग

उज्जैन- धार्मिक पर्यटन नगर के तौर पर विकसित होने वाले शहर में आज का दिन भगवान श्रीगणेश की स्तुति के नाम रहा। इस दौरान चिंतामन गणेश के दरबार में सवा लाख तिल के लड्डुओं का भोग लगा। इसके अलावा शहर के अन्य गणेश मंदिरों में भी भक्त उमड़े। इस दौरान तड़के 4 बजे से ही भगवान के दरबार में पूजन किया गया। भोग के बाद प्रसादी का वितरण भक्तों के बीच किया गया।

मंदिर के पट खुलते ही भगवान चिंतामन गणेश को स्नान करवाया और पूजन किया। पूजन के साथ भगवान को सवा लाख तिल के लड्डुओं का भोग लगाया गया। सर्द मौसम होने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुंचे।

मंदिर के पुजारी पंडित शांतु गुरु ने बताया कि कुछ श्रद्धालुओं ने अपने घरों में बने तिल के व्यंजनों का भोग भी चिंतामन को लगाया। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा पूजन के दौरान श्रीगणपति अथर्वशीर्ष पाठ की गूंज सुनाई देती रही। तिल चतुर्थी पर चिंतामन को चांदी के वर्क और लेस से शृंगारित किया गया।

तीन स्वरूप में देते हैं दर्शन– श्रीचिंतामन मंदिर में तीन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा पूजन के दौरान ध्यान से देखने पर उन्हें मूर्ति के तीन स्वरूप दिखलाई देते हैं। एक स्वरूप को सिद्धि विनायक कहा जाता है तो दूसरे को मंछामन या इच्छामन कहते हैं और तीसरे स्वरूप को चिंतामन गणेश कहा जाता है। भगवान अपने तीनों स्वरुप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भगवान की मूर्ति स्वयंभू है।

भगवान राम ने किया था पूजन – मंदिर के पुजारी ने बताया भगवान राम जब अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध करने के लिए उज्जैन आए तो उनका आगमन यहां भी हुआ। इसी दौरान राम, लक्ष्मण और सीता ने यहां पूजन किया। मंदिर में भगवान की स्वयंभू मूर्ति विराजमान है।

कहा जाता है कि जब माता सीता को प्यास लगी तो उनकी प्यास बुझाने के लिए लक्ष्मणजी ने धरती पर बाण चलाया, जिसके बाद यहां से जमीन में से पानी की आव फूटने लगी। कालांतर में पानी की धार से बावड़ी निर्मित हो गई, जिसे लक्ष्मण बावड़ी कहा गया।