दिव्य ज्ञानपथ का अनुसरण करने के लिए जिज्ञासुओं को किया प्रेरित

हर प्रकार की मानवीय प्रगति पूछे गए प्रशनों पर आधारित है। अधिकतर यह देखा गया है कि जिज्ञासुयों को जिस भी वस्तु को जानने की जिज्ञासा होती है, उसमें वह अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इच्छुक रहते हैं। प्रशन उनकी सोच को प्रोत्साहित करते हैं और कभी-कभी मौखिक तथ्य हमारे सभी प्रशनों के उत्तर नहीं दे पाते और यहीं पर पुस्तकों के महत्त्व की बात आती है। पुस्तकें उन प्रशनों का उत्तर देने के लिए माध्यम के रूप में कार्य करती हैं। मुख्य बात तो यह है कि किताबें हमारी चिंताओं एवं विचारों को सरल बनाती हैं|दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डी.जे.जे.एस), एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्था है जिसके संस्थापक एवं संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी है|

श्री महाराज जी की असीम अनुकम्पा द्वारा संस्थान ने 06 से 14 जनवरी 2018 तक विश्व पुस्तक मेले में आध्यात्मिक साहित्य का स्टाल लगा कर भाग लिया| मेले में देश विदेशों से जिज्ञासुगण ज्ञान की पिपासा लिए पहुंचे। जब आध्यात्म की बात आती है तो चाहे किसी का मूल देश कोई भी क्यों न हो, भारत की भूमिका को कौन नाकार सकता है? एक देश जिसकी संस्कृति, विशवास प्रणाली और मूल्य ही आध्यात्म का आधार हैं।

यह कहा गया कि जब हम अन्तकरण से प्रार्थना करते हैं तो ईश्वर हमारी पुकार अवश्य सुनते हैं और जब हम ईश्वर के प्रति जिज्ञासा रखते हुए धर्मग्रंथों का पठन-पाठन करते है तो हम महापुरुषों द्वारा दिए गए दिव्य संदेशों को भी समझ पाते है| इसी जिज्ञासा को शांत करने हेतु डी.जे.जे.एस ने आंगतुकों के समक्ष इस संवाद को प्रस्तुत किया| गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के प्रचारक शिष्यों एवं स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक स्टाल पर आगंतुकों के साथ स्पष्ट वार्तालाप कर उनकी जिज्ञासा को शांत किया एवं संस्थान द्वारा समाज कल्याण हेतु निस्वार्थ भाव से किये जा रहे कार्यों के केन्द्रबिन्दुओं पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने संस्थान के इतिहास और विचारधारा को सुसंगत रूप से प्रस्तुत करते हुए व्यक्तिगत रूप में आगंतुकों को अध्यात्म के बारे में जागरूक किया| स्टाल पर संस्थान द्वारा प्रकाशित अध्यात्मिक पुस्तकें जैसे Search of the truth, Mind, समाधी, दिव्य ज्ञान प्रकाश, अखंड ज्ञान (मासिक पत्रिका) इतियादी जिज्ञासुओं के संग्रह का मुख्य आकर्षण बनी| साथ ही उन्हें विभिन्न सामाजिक प्रकल्पों जैसे कि अन्तरक्रांति (कैदियों के पुनर्वास हेतु कार्यक्रम), अंतर्दृष्टि (नेत्रहीनों को स्वनिर्भर बनाने हेतु कार्यक्रम), संरक्षण (पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम), मंथन (अभावग्रहस्त बच्चों के लिए शिक्षा कार्यक्रम), संतुलन (लैंगिक समानता कार्यक्रम) आदि के बारे में भी बताया गया। इस वर्ष भी अध्यात्म, भक्ति, आत्म-ज्ञान आकर्षण का केंद्र बने|

स्टाल पर जो भी आगंतुकों ने विजिट किया उनके लिए विशेष रूप से स्वयंसेवकों की समाज के लिए निस्वार्थ भावना, आध्यात्म से जुड़े रहस्यों तथा संस्थान द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में जान कर संसथान से जुड़ने की ओर भी रूचि बढ़ती देखने को मिली। उनमें से कई जिज्ञासुओं ने ब्रह्मज्ञानकी दीक्षा प्राप्त करने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने संस्थान द्वारा जाति, पंथ, विश्वास या किसी अन्य पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सच्चाई के संदेश को प्रसारित करने के लिए अत्यधिक सराहना व्यक्त की। लोगों के बीच जिज्ञासा पैदा करने और आध्यात्म के सही संदेश को प्रसारित करने का उद्देश्य लिए इस वर्ष की भागीदारी का उद्देश्य भी सही ढंग से पूर्ण किया गया।