दूसरों में गुण देखें और अपनी गलतियों से सीखें

एक व्यक्ति बहुत परेशान था। एक दिन उसे एक साधु मिला। उसने साधु से कहा कि मैं बहुत पापी इंसान हूं, कृप्या मुझे सही मार्ग पर लेकर चलो। सादु ने उससे कहा, ‘इसके लिए तुम अपने से भी पापी इंसान या तुच्छ या किसी काम न आने वाली वस्तु तुम्हें मिले उसे मेरे पास लेकर आओ’।

उस व्यक्ति को सबसे पहले उस इंसान को एक कुत्ता मिला। उसने कुत्ते को साथ लेकर जाना चाहा। लेकिन उसमें वफादारी का गुण था। इसलिए वह आगे चल दिया। इसके बाद उसे जंगल में कांटेदार झाड़ी मिली। कांटेदार झाड़ियों से जहां हाथों में चुभ जाती हैं वहीं खेत में बाड़ लगाने और फसलों की पशुओं से रक्षा करने के काम आती हैं।

इस तरह रास्ते में मिली हर वस्तु में उसे कहीं न कहीं एक अच्छाई नजर आ गई। अत: वह साधु के पास गया और बोला कि मुझे अपने से तुच्छ और बेकार कोई चीज नहीं मिली। तब साधु ने कहा कि हम सभी में कहीं न कहीं एक अच्छाई छिपी होती है। दूसरों में गुण देखें और अपनी गलतियों से सीखने वाले को कभी भी किसी के उपदेश की जरूरत नहीं होती है।