नर्मदा विकास घाटी मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल ने ली अधिकारियों की बैठक

मंत्री स्नान के इंतजाम देखने आए, कांग्रेसी नेता नजदीकी दिखाने का प्रयास करते रहे

निगमायुक्त व कार्यपालन यंत्री पर कार्यवाही के लिए दिया ज्ञापन

उज्जैन। मकर संक्राति स्नान निर्विघ्न हो, इसके इंतजाम देखने शुक्रवार को नर्मदा विकास घाटी मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल आए। उन्होंने बृहस्पति भवन में बैठक कर प्रशासनिक अधिकारियों को टीम बनाकर काम करने का कहा।

यहां कुछ कांग्रेसी नेता खुद को मंत्री बघेल से नजदीक मंडराकर उनका खास दिखाने का प्रयास करते रहे। एक नेता ने शनिश्चरी अमावस्या की अव्यवस्था के लिए निगमायुक्त और पीएचई ईई को जिम्मेदार बताकर उन्हें हटाने की मांग भी की।

प्रदेश सरकार कि शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं को क्षिप्रा-नर्मदा के पानी से स्नान नहीं करवा पाने के कारण काफी किरकिरी हुई थी। नतीजतन शासन १५ जनवरी मकर संक्राति स्नान को लेकर काफी सर्तक है। इसी के चलते दोपहर में मंत्री बघेल यहां पहुंचे।

उन्होंने महाकाल व शनि मंदिर में पूजा की। दोपहर में अधिकारियों के साथ रामघाट का अवलोकन करने के बाद बृहस्पति भवन में आधा घंटा बैठक ली। यहां उन्होंने मकर संक्राति स्नान के इंतजाम की जानकारी लेने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि जनप्रतिनिधियों से भी समन्वय बनाएं और अच्छी टीम बनाकर काम करें।

वहीं ध्यान रखें कि श्रद्धालुओं को भी कोई परेशानी नहीं आए। बैठक में प्रमुख रूप से कमिश्नर अजीत कुमार, आईजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर शंशाक मिश्रा, एसपी सचिन अतुलकर, जिला पंचायत सीईओ संदीप, निगमायुक्त प्रतिभा पाल, पीएचई ईई धर्मेंद्र वर्मा, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के रजनीश मिश्र के साथ ही संबंधित अन्य विभाग के अधिकारी, विधायक रामलाल मालवीय, मुरली मोरवाल, महेश परमार के साथ अन्य प्रबुद्धजन भी मौजूद थे।

खास बात यह रही कि मंत्री बघेल के आने पर कुछ कांग्रेस के नेता उनके आगे-पीछे मंडराते रहे। यहां तक की बैठक के दौरान ये नेता मंत्री के वाहन के पास ही खड़े रहे। यह देख पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी मुस्कराते रहे।

पीने के पानी की कमी नहीं आएगी

बैठक में यह सवाल उठने पर कि स्नान के लिए गंभीर का पानी शिप्रा में छोडऩे से क्या गर्मी में शहर में पीने के पानी का संकट नहीं आएगा। सीएस वैश्य ने बताया जो पानी लिया जा रहा हैए मात्र 1 दिन की सप्लाई का है।

जो पानी लिया जाएगा उसकी आपूर्ति नर्मदा के पानी से तथा आवश्यकता पड़ी तो यशवंत सागर के पानी से कर दी जाएगी। किसी भी स्थिति में पेयजल समस्या नहीं आएगी।

कलेक्टर मिश्रा ने बताया कि गंभीर डेम में फिलहाल 1267 एमसीएफटी पानी ,साहिबखेड़ी तालाब में 38 एमसीएफटी, उंडासा तालाब में 6 एमसीएफटी और शिप्रा बैराज में 20 एमसीएफटी पानी है। चारों स्थानों पर वर्तमान में कुल 1331 एमसीएफटी पानी है।

उस दिन कहां थे कांग्रेसी नेता

बैठक के दौरान मंत्री बघेल ने 5 जनवरी को हुई शनिश्चरी अमावस्या पर अव्यवस्था के संबंध में पूछा। अधिकारियों ने व्यवस्था के संबंध में बता दिया। बैठक स्थल के बाहर कुछ कांग्रेसी नेता ही इसे प्रशासन की लापरवाही बताते रहे।

यहां तक की पूर्व मंडी संचालक गोपाल यादव ने मंत्री बघेल को ज्ञापन भी दिया। इसमें उन्होंने शनिश्चरी अमावस्या की घटना के लिए निगमायुक्त पाल व पीएचई के कार्यपालन यंत्री वर्मा को जिम्मेदार बताते हुए दोनों को हटाने की मांग कर दी। कांग्रेस नेताओं द्वारा छह दिन बाद अब चिंता जताने पर अधिकारियों में चर्चा थी कि नहान के समय कहां थे। वहां क्यों नहीं आए।

कैलेंडर देखकर होगी तैयारी

सालभर में आने वाले सभी पर्व को लेकर प्रशासन कैलेंडर बनाता है। तय होता है कौन सा त्यौहार कब आता है और प्रशासन को क्यां तैयारी करना होती है। प्रशासन इस कैलेंडर के हिसाब से ही काम करेंगा, जिससे स्नान के एक-दो दिन पहले पानी छोड़ा जा सके। मकर संक्राति स्नान के लिए भी प्रशासन १३ जनवरी की रात से नदी में पानी छोड़ देगा।