नृत्यांगना शिप्रा ने 400 बच्चों को सिखाया कथक

उज्जैन। नई दिल्ली से आई ख्यात एवं युवा नृत्यांगना शिप्रा जोशी ने बुधवार को उज्जैन के दो शासकीय स्कूलों में कथक नृत्य की प्रस्तुति देकर मंत्रमुग्ध तो किया ही उन्होंने 400 बच्चों को कथक नृत्य भी सिखाया। नृत्यांगना शिप्रा ने बच्चों को कथक की कई मुद्राएं भी सिखाई और उन्हें मंच पर बुलाकर उनके साथ नृत्य भी किया। युवाओं को भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने के लिए प्रयासरत संस्था स्पिक मैके एवं भारत सरकार के उपक्रम आईओसीएल के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन रखा गया। पहले खिलचीपुर स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में दोपहर 2 बजे से कार्यक्रम शुरू हुआ जिसमें प्रथम प्रस्तुति की शुरुआत शिप्रा ने गणेश वंदना से की। जिसमें उन्होंने प्रथम सुमिरो श्री गणेश पर नृत्य कर राग देश 12 मात्रा में भाव पक्ष का सुंदर वर्णन किया।

बच्चों ने शिप्रा का तालियां बजाकर स्वागत किया। पंकज अग्रवाल ने बताया कि एक घंटे की प्रस्तुति में शिप्रा ने 200 बच्चों को कथक नृत्य के कई गुर सिखाए। इस दौरान उन्होंने हस्त मुद्रा, तत्कार और चक्कर का विशेष प्रशिक्षण दिया। स्कूली बच्चे भी शिप्रा के नृत्य से खुश हो गए। विद्यालय की सहायक शिक्षिका प्रतिभा दानी ने नृत्यांगना शिप्रा का स्वागत किया। दूसरी प्रस्तुति शिप्रा ने खिलचीपुर में ही शासकीय माध्यमिक एवं हाईस्कूल दौलतगंज क्रं-२ में दी।

यहां भी उन्होंने नृत्य किया और 200 बच्चों को कथक सिखाया। प्रारंभ में यहां उन्होंने राग मांड 11 मात्रा में निबद्ध ताल अष्ट मंगलम में कथक के तकनीकी पक्ष को उजागर किया। विद्यार्थियों को कथक की बारीकियों से रूबरू कराया। कार्यक्रम के समापन में स्कूल के डीडी रायकवार ने आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान शिप्रा ने बच्चों से कहा कि उत्तर भारत का प्रमुख प्रतिनिधि और लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य कथक ही है। कथक का शाब्दीक अर्थ है कथा कहना। यानी नृत्य के जरिए उसे प्रस्तुत करना। शताब्दियों की गौरवशाली यात्रा करते हुए कथक नृत्य का स्वरूप आज भी निरंतर बना हुआ है। शास्त्रीय कथक नृत्य सुयोग्य गुरुओं के निर्देशन में ही प्रशिक्षण एवं अभ्यास के जरिए सिखकर इसमें महारथ हासिल की जा सकती है।