पुलिस के साए में दलित दूल्हा चढ़ा घोड़ी, फेरे के बाद करवाई विदाई भी

सुसनेर के माणा गांव में पहली बार किसी दलित दूल्हे की बरात निकली, वह भी पुलिस की भारी सुरक्षा के बीच। दबंगाें की चेतावनी को देखते हुए बरात ही नहीं, विवाह की दूसरी रस्में भी पुलिस के पहरे में हुईं। वर-वधू को आशीर्वाद देने एसपी भी गांव पहुंचे। 
गांव के दलित वर्ग के चंदर मेघवाल ने प्रशासन को शिकायत की थी रविवार को बेटी ममता की शादी में गांव के कुछ दबंग रुकावट डाल सकते हैं।ममता का रिश्ता राजगढ़ निवासी दिनेश से तय हुआ था। बरात के रविवार को आने का कार्यक्रम तय था।चंदर ने शिकायत में कहा था कि गांव के कुछ लोगों ने बरात का जुलूस नहीं निकालने की हिदायत दी थी।उन्होंने सामान्य विवाह की तरह गांव में बैंडबाजे के साथ बरात नहीं निकालने को कहा था।

 चंदर की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और शनिवार को गांव में पुलिस भेज दी।रविवार को बरात आई तो गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा। तय कार्यक्रम के मुताबिक पुलिस के साए में धूमधाम से जुलूस निकला। मंडप में भी पुलिस तैनात रही। पुलिस के साए में बरात निकली और एसपी खुद मौके पर पहुंचे और वर-वधु को आशीर्वाद देकर उन्हें विदा किया।सुसनेर से 12 किमी दूर ग्राम माणा में दलित वर्ग के 55 से ज्यादा परिवार हैं।

इनमें मेघवाल, वाल्मीकि और आदिवासी शामिल हैं।इनकी बस्ती भी गांव के छोर पर बसी हुई है। ग्रामीणों ने दलित परिवार को बैंड बाजे से शादी करने पर कई प्रकार की बंदिशें लगा देने की चेतावनी दे रखी है।इन बंदिशों के भय से ही किसी ने आज तक बरात गांव में बैंड बाजे के साथ नहीं निकाली। गांव में पेयजल स्रोत पर यदि किसी अन्य समुदाय के लोग खड़े हों तो वहां से दलित पानी भी नहीं भर सकते।प्रशासन के पास इस तरह की शिकायत पहली बार आई थी। पुलिस और प्रशासन ने पूरी जिम्मेदारी से शिकायत का निपटारा कर बैंड बाजे से बरात निकलवाई है। क्षेत्र में इस तरह की हरकत को रोकने के लिए प्रशासन अपनी ओर से ग्रामीणाें को जागरूक करने का प्रयास करेगा।जी.एस. डावर, एसडीएम