पूरी तरह आश्वस्त हुए बगैर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए

एक बार रूरल मैनेजमेंट कॉलेज के प्रोफेसर अपने सभी छात्रों को उत्तर प्रदेश के एक बहुत गरीब गांव में ले गए। छात्रों के लिए खेती का वह पहला अनुभव था। नीचे बैठकर खाना खाना, खटिया पर सोना, खेती करना, बैलगाड़ी चलाना आदि कितना कुछ उनके लिए सीखने को था। उन्होंने यह भी महसूस किया कि देश की पचास प्रतिशत से अधिक आबादी बहुत मुश्किल हालत में अपना घर चलाती है। उन छात्रों में एक लड़का था संदीप। पिता ने उसे एक बहुत महंगी घड़ी तोहफे में दी थी, जो संदीप हमेशा पहने रहता था।

जब वापस लौटने का समय आया, तो प्रोफेसर ने सभी छात्रों को सब समेटने को कहा। संदीप और उसके कुछ साथी भूसे का ढेर बनाने में लग गए। जब भूसे का ढेर बन गया, तो संदीप के एक दोस्त ने देखा कि उसके हाथ से उसकी प्रिय घड़ी गायब है। संदीप परेशान हो गया। प्रोफेसर बोले, मुझे यकीन है, घड़ी यहीं कहीं गिर गई होगी। संदीप बोला, सर, मुझे लगता है कि मेरी घड़ी किसी ने चुरा ली है।

 

प्रोफेसर ने अपने सभी छात्रों को गांव का चप्पा-चप्पा छानने को भेज दिया। गांव का हर कोना छानने के बाद भी जब संदीप की घड़ी नहीं मिली, तो प्रोफेसर बोले, आप सब लोगों ने अपना प्रयास कर लिया। पर किसी को घड़ी नहीं मिली। हमें एक मौका गांव के लड़कों को भी देना चाहिए।संदीप और उसके साथी बोले, जब हम सब घड़ी नहीं ढूंढ सके, तो ये लोग क्या ढूंढ पाएंगे। प्रोफेसर के बुलाते ही गांव का एक लड़का आया और संदीप के बनाए भूसे के ढेर के पास अपना कान जमीन पर लगाकर लेट गया।

फिर उस लड़के ने भूसे के ढेर में हाथ डाला और एक बार में संदीप की घड़ी निकाल ली। संदीप और उसके साथी हैरान रह गए। प्रोफेसर बोले, बहुत आसान-सी बात है। तुम लोग भरे गिलास में पानी भरने की कोशिश कर रहे थे। और वह खाली गिलास भरने की कोशिश कर रहा था। किसी पर विश्वास करना कठिन है, लेकिन उंगली उठाना आसान।