प्रार्थना गुरु शिष्य के संबंध को दृढ़ता प्रदान करती है

दिव्य धाम आश्रम, पंजाब खोर, नई दिल्ली में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आध्यात्मिक भंडारे का आयोजन किया गया! गुरु-शिष्य के संबंधों को दृढ़ता प्रदान करने के लिए हर माह संस्थान द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस बार भी एक भव्य मंच से सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याओं ने आध्यात्मिक विचारों एवं सुमधुर भजनों की श्रंखला द्वारा आए हुए भक्त-श्रद्धालुओं को भक्ति के लिए प्रेरित किया। साध्वी जी ने कहा कि एक सच्चे गुरु ही शिष्य के भीतर दिव्य ज्ञान को जागृत करते हैं। गुरु ही एक शिष्य को सही दिशा प्रदान कर आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरणा प्रदान करते है! परन्तु यह शिष्य पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार से अपने गुरु को शरणागत हो पाता है!

जब जब भी कोई शिष्य भक्ति मार्ग पर बढ़ा है उसे मार्ग में कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है! कभी हमारे आसपास की परिस्थितियां हमें निषिद्ध करती हैं तो कभी आंतरिक मन हमें आगे बढने नहीं देता, इसी कारण हम शारीरिक तथा मानसिक रूप से कार्यों को करने में असमर्थ हो जाते हैं।स्वामी जी ने बताया कि ऐसी स्थिति में केवल मात्र हमें गुरु के चरणों में प्रार्थना रखनी है! प्रार्थना गुरु और शिष्य के बीच के बंधन को मजबूत करती है।

और यही प्रार्थना की तरेंगे हमारे मन को तो शांत करती ही है साथ ही हमारे आस पास के वातावरण को भी पवित्र कर शांति प्रदान करती है! जैसे जैसे एक शिष्य गुरु द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करता है तो उसे आत्मिक शान्ति के साथ साथ मानसिक और शारीरिक संकटों से लड़ने का संबल भी प्राप्त होता है और वह कठिन समय के लिए भी अपने आप को दृढ़ संकल्पित करने में सक्षम हो जाता है!