फटकार के बाद घर-घर तलाशेंगे कुपोषित बच्चे

अक्षरविश्व न्यूज. इंदौर

दो दिन पहले चाचा नेहरू अस्पताल में एक कुपोषित बच्ची को इलाज के लिए लाया गया था जिसे देखने स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट भी पहुंचे थे, जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई थी कि शहर में और कितने कुपोषित बच्चे हंै उनकी तलाश की जाए और उन्हें पर्याप्त इलाज मिल रहा है या नहीं इसकी एक सूची बनाकर उन्हें जल्द ही सौंपी जाए।
फटकार के बाद महिला बाल विकास के अधिकारी गली-मोहल्ले में घूम-घूम कर कुपोषित बच्चों की तलाश करते नजर आएंगे। मध्यप्रदेश शासन कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए लाखों रुपए खर्च करता है, परंतु अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इस तरह के बच्चों का ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पाता है। कई बार कुपोषण की वजह से बच्चों की मौत तक हो जाती है। कुपोषित बच्चों की तलाश करना या उनके बारे में जानकारी निकालने की जिम्मेदारी क्षेत्रों में संचालित होने वाली आंगनवाड़ी की होती है। जिनकी मदद महिला बाल विकास विभाग करता है, क्योंकि कुपोषण के इलाज के लिए पूरी राशि महिला बाल विकास के पास ही आती है, परंतु लापरवाही इतनी की अधिकारी इसमें भी हेराफेरी कर कागजों पर ही बच्चों की जानकारी दे देते हैं और भोपाल पहुंचा देते हैं। परंतु अब ऐसा नहीं चलेगा।
चाइल्ड लाइन की मदद से एक मासूम बच्ची को कुपोषण की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जब मामले में तुलसी सिलावट को जानकारी लगी थी तो उन्होंने डाक्टर व अधिकारियों को मौके पर ही फटकार लगाते हुए कहा था कि अब ऐसी लापरवाही नहीं चलेगी। 15 दिन के अंदर शहर में जितने भी कुपोषित बच्चे हंै उनकी एक सूची तत्काल बनाई जाए और जानकारी मुझे भेजी जाए।
वे खुद इस मामले को संज्ञान में लेकर व्यवस्था पर मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा करेंगे और प्रदेश से कैसे कुपोषण खत्म किया जा सके उस पर विचार कर अधिक से अधिक राशि दिलवाएंगे जिससे छोटे बच्चों के इलाज में किसी भी तरह की परेशानी न हो। वहीं मामले में चाचा नेहरू अस्पताल के प्रबंधक हेमंत जैन ने बताया कि रोजाना तो नहीं परंतु हफ्ते में एक बच्चा तो कुपोषण का इलाज करवाने के लिए आता ही है जिसे अस्पताल में पर्याप्त सुविधा मुहैया कराई जाती है।