बंद होने की कगार पर पहुंचा यस बैंक

देश का पांचवा प्रमुख निजी बैंक–यस बैंक बंद होने की कगार पर पहुंच चुका है। अगर इसे बंद करने की घोषणा नहीं की जाती है, तो फिर भविष्य में करोड़ों ग्राहकों के लिए दिक्कतें पैदा कर सकता है। अब भारतीय रिजर्व बैंक को इसके बारे में जल्द निर्णय लेना पड़ेगा ताकि छोटे निवेशकों की जमा-पूंजी को डूबने से बचाया जा सके। बैंक के पास केवल मार्च तक का वक्त बचा है, जिसमें उसे फैसला लेना है।

बैंक से बाहर हो चुके हैं संस्थापक, को-फाउंडर- ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, देश का पांचवां सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक चलाने वाले को-फाउंडर बैंक को बैड कॉरपोरेट लोन में फंसा चुके हैं। इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स बैंक से बाहर निकल रहे हैं। छोटे निवेशक इस उम्मीद में निवेश कर रहे हैं कि यस बैंक फंड का इंतजाम कर लेगा। बैंक का नया मैनेजमेंट फंड जुटाने के नामुमिन विकल्पों पर गौर कर रहा है। इन विकल्पों में कनाडा के अरबपति से लेकर एक गुमनाम आईटी कंपनी तक शामिल है।  वहीं बैंक के संस्थापक राणा कपूर और सह-संस्थापक अपने सभी शेयर बेच कर के पूरी तरह से बाहर हो चुके हैं।

बैंक के बंद से होने से लोन डूबने की आशंका- बैंक के पास मार्च तक दो विकल्प बचे हैं। पहला यह कि वो खुद को बंद करने की घोषणा कर दे। दूसरा किसी सरकारी या फिर निजी बैंक में इसका विलय कर दिया जाए, ताकि छोटे निवेशकों की जमा पूंजी और कर्मचारियों के पास नौकरी जाने का खतरा न रहे। अगर बैंक बंद होता है, तो फिर इसका पूरे बैंकिंग सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके साथ ही यह सरकार के लिए भी अच्छी खबर नहीं होगी।

17 महीनों में 88 फीसदी गिरा शेयर- पूंजी की दिक्कत से जूझ रहे यस बैंक के शेयर पिछले 17 महीनों में 88 फीसदी तक गिर चुके हैं। शुक्रवार को इसके शेयर में पांच फीसदी और सोमवार को आठ फीसदी तक गिर गया है। बैंक का 36 फीसदी कैपिटल बैड लोन में फंसा हुआ है। अभी बैंक के लोन डूबने की आशंका ज्यादा है। बैंक का 40 फीसदी डिपॉजिट उन लोगों के हैं जो कभी भी मन बदल सकते हैं। ऐसे में सॉल्वेंसी और लिक्विडिटी की दिक्कत बैंक के लिए बनी रहेगी।

एसबीआई में हो सकता है विलय- यस बैंक की जैसी हालत हो चुकी है इसका स्वतंत्र तौर पर चल पाना मुश्किल है। इसे बंद करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। को-ऑपरेटिव बैंक में अपना पैसा फंसा चुके निवेशक पहले ही हाशिए पर हैं। यस बैंक के लिए इसका विलय करना ही आखिरी रास्ता है। ऐसे मे कोटक महिंद्रा बैंक से जब यह पूछा गया कि क्या वह इसे खरीदेगा।

बैंक के चेयरमैन उदय कोटक ने इसमें कोई रुचि नहीं जताई थी। एसबीआई शायद ही यस बैंक के विलय के लिए राजी हो। लेकिन एसबीआई के अलावा शायद ही कोई बैंक हो जो यस बैंक के 31 अरब डॉलर के लोन को पचा सके।

सोमवार को यस बैंक का शेयर 2.60 अंक यानी 5.81 फीसदी की गिरावट के बाद 42.15 के स्तर पर बंद हुआ। जबकि शुरुआती कारोबार में यह 43.40 के स्तर पर खुला हुआ था। वहीं पिछले कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को यह 44.75 के स्तर पर बंद हुआ था। इसके बाद इसका बाजार पूंजीकरण 107.25 अरब रुपये पर पहुंच गया।

नवंबर में आई थी निवेश की बात- पूंजी के संकट से जूझ रहे यस बैंक में 14000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करने के लिए आठ निवेशक नवंबर 2019 में तैयार हो गए थे। इन आठ निवेशकों में राकेश झुनझुनवाला की पत्नी रेखा झुनझुनवाला भी शामिल थीं। यस बैंक ने तब  बताया था कि कनाडा के उद्योगपति अर्विन सिंह ब्रेच, आदित्य बिड़ला फैमिली ऑफिस और रेखा झुनझुनवाला सहित कुल आठ निवेशक 14348 करोड़ रुपये निवेश करेंगे। हालांकि बैंक ने हाल ही में इरविन सिंह ब्रिच के 1.2 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव को नकार दिया है।

यस बैंक के स्वतंत्र निदेशक उत्तम प्रकाश अग्रवाल ने कंपनी संचालन में आती गड़बड़ियों और अन्य मामलों पर गंभीर चिंताएं जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यस बैंक के गैर-कार्यकारी अंशकालिक चेयरमैन ब्रह्म दत्त को भेजे इस्तीफे में कहा, ‘‘मैं यस बैंक के स्वतंत्र निदेशक, ऑडिट समिति के चेयरमैन तथा निदेशक मंडल की सभी अन्य समितियों की सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।’’

उन्होंने पत्र में कंपनी संचालन स्तर के गिरने का जिक्र करते हुए सीईओ एवं एमडी रवणीत गिल समेत अन्य लोगों पर सवाल खड़े किए हैं।
राणा कपूर की जगह पर सीईओ बने रवनीत गिल के लिए बैंक को चलाने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता है। शुक्रवार को बैंक का मार्केट कैप 11,426.12 करोड़ रुपये था।  बता दें कि 1 अक्टूबर 2019 को पहली बार यस बैंक के शेयर 30 रुपये के नीचे आए थे।