बाबा साहब का जीवन राष्ट्रीयता की प्रेरणा से भरा हुआ था

उज्जैन। बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती मनाना ठीक वैसा ही है जैसे गिरिराज की पूजा से पूरे पर्वत की आराधना पूरी हो जाती है। बाबा साहेब आंबेडकर उसी गिरिराजजी की प्रतिमा हंै जिनकी पूजन से समाज उत्थान एवं राष्ट्रीय जनजागरण करने वाले कई महापुरुषों का पूजन स्मरण हो जाता है। यह बात सामाजिक सद्भावना समिति द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव सम्मेलन एवं डॉ आंबेडकर जयंती कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के सामाजिक समरसता संयोजक प्रमोद झा ने कही। अध्यक्षता रामानुजकोट के पीठाधीश्वर रंगनाथाचार्य जी महाराज ने की। कुलदीपक जोशी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के तहत वाल्मीकि, अग्रवाल, ब्राह्मण, सेन, भावसार, सिख, क्षत्रिय आदि समाज की महिलाओं ने रामघाट पर आकर्षक रंगोलियां बनाईं। महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा संत कबीर एवं मीराबाई के भजनों की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद 210 0 दीपों से मां शिप्रा की आरती की गई। बंगाली समाज की महिलाओं द्वारा बंगाली वेशभूषा में ही शंख ध्वनि की गई। समापन में सिख समाज के निमंत्रण पर गुरुनानक घाट गुरुद्वारे के लंगर में प्रसाद ग्रहण किया। जानकारी जसविंदर सिंह ठकराल ने दी।