बोझ नहीं सफलता का मंत्र है बंधन, इन 3 नियमों से समझें

ज्यादातर लोग बंधन शब्द को नकारात्मक मानते हैं। मगर इसे दूसरे नजरिए से देखा जाए तो यह प्यार भरा शब्द है। यह अपनत्व का एहसास कराता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है सोशल मीडिया, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बैठे दो लोगों को आपस में जोड़ता है। नकारातमक भाव हमारे अंदर उदासी के भाव को जगाता है, जो हमें आगे बढ़ने से रोकती है। हालांकि कई बार अपनी सच्चाई को कुबूल करना अच्छा होता है। इसलिए जो कर रहे हैं उसमें न तो बंधन महसूस करें और न ही उससे भागने की कोशिश करें। यही है हमारा आज का 3 जीवन मंत्र, आइए इन्हें जानें :

1. हम सब एक-दूसरे के सुख-दुख से बंधे हुए हैं। रूमी कहते हैं,‘दुनिया में हर चीज और हर व्यक्ति एक-दूसरे से न दिखने वाले धागों से बंधे हैं। तो किसी का दिल न तोड़ें, किसी को भी अपने से कम न समझें। दुनिया के किसी दूसरे कोने में बैठे आदमी का दुख… सारी दुनिया को दुखी बना देता है, रुला देता है…इसी तरह किसी एक आदमी का सुख सारी दुनिया को खिलखिलाकर हंसा देता है।’

2. खुद को किसी बेहतर जगह और बेहतर लोगों के बीच देखने की इच्छा होती ही है। इसमें कुछ गलत नहीं है। पर समस्या तब होती है, जब हर समय कुछ और ही होने की उदासी हमें घेरे रहती है। लेखक स्टीव मैराबली कहते हैं, ‘आप जिनके साथ हैं और जो काम कर रहे हैं, उसमें खुशी महसूस करें। यकीनन, आप हर वो काम कर लेंगे, जो आप चाहते हैं।’

3. कई बार यही समय की जरूरत होती है कि मान लें कि हम वह सब हासिल नहीं कर सकते, जो चाहते हैं। अगर हम बीमार, थके हुए या उदास हैं, तो सबसे पहला काम खुद को बेहतर करने का ही होना चाहिए। लेखिका लोरी डेशने कहती हैं, ‘एकबारगी लग सकता है कि आप पीछे रह गए हैं, पर इसका यह मतलब नहीं है कि आप हार गए हैं। आप जो कर रहे हैं, अपनी देखभाल के लिए कर रहे हैं। यही जरूरी है।’