भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीखें सफलता ये 7 सूत्र

नटखट आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित जन्माष्टमी का पर्व इस बार 23 अगस्त को मनाया जाएगा। भगवान कृष्ण ने अपने जीवन को जिस तरह से प्रेम, पराक्रम और कुशलता के साथ जिए उसकी अभी तक लोग मिसाल देते हैं। उन्होंने बचपन में ही अपने अन्यायी मामा कंश का वध किया और फिर अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीति कौशल से पांडवों को विजय दिलाई। किसी में सीखने की ललक हो तो वह भगवान कृष्ण के जीवन से बहुत कुछ सीख सकता है। भगवान श्रीकृष्ण का पूरा जीवन विभिन्न दुर्लभ प्रसंगों से भरा हुआ है। हर बार वह नए भाव, नई कला और चाल व चमत्कार से समय को अपने पक्ष में कर लेते थे। यहां हम महाभारत के से भगवान श्रीकृष्ण के कुछ गुणों की बात कर रहे हैं जिन्हें सफलता सूत्र के रूप में अपनाया जा सकता है-

मित्रता की कीमत पहचानना – दोस्त वही, जो हर समय साथ दे। उन्होंने सुदामा का साथ दिया तो पांडवों का भी। सच्चे दोस्तों को कभी नहीं भूले। महाभारत से पहले वह कौरवों के पास पांडवों से दोस्ती का प्रस्ताव लेकर भी गए थे।

अपने मजबूत पक्ष को पहचनाना – श्रीकृष्ण कौरवों के रण कौशल से परिचित थे। पांडवों को इसी आधार पर जीत का तरीका समझाया।

रणनीति के साथ काम करना – कृष्ण कुशल रणनीतिकार थे। अश्वत्थामा-जयद्रथ का वध उनकी व्यूह रणनीति का परिणाम है।

कर्म पर फोकस- श्रीकृष्ण ने गीता में कर्मयोग के जो सिद्धांत दिए, वही प्रबंधन की शिक्षा में निहित हैं। अपने लक्ष्य पर डटे रहो।

दूरदर्शिता – कृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि इंसान को काल-परिस्थितियों का आकलन करना आना चाहिए।

साहस से सफलता की कला – कौरवों की 11 अक्षौहिणी सेना थी। कृष्ण ने पांडवों को समझाया, हिम्मत मत हारो। पूरी कोशिश करो।