भाई का भाई से प्रेम हो, संपत्ति से नहीं

सामाजिक न्याय परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में भरत प्रसंग का वर्णन
उज्जैन। भाई का प्रेम भाई से होना चाहिए संपत्ति से नहीं। जिस तरह भरतजी का प्रेम रामजी से रहा, ऐसा प्रेम हमारा रामजी से हो तो प्रकृति भी हमारे अनुकूल हो जाती है यदि संसार से प्रेम हुआ तो प्रकृति भी प्रतिकूल हो जाएगी। राम-भरत मिलन प्रसंग हमें यही सिखाता है कि अधिकार मिलने पर कर्तव्यों को न भूलें जिस तरह भरतजी ने राम को नहीं छोड़ा। यह बात सामाजिक न्याय परिसर में चल रही श्रीराम कथा में पं. सुलभ शांतु गुरु ने कही। कथा समापन पर पूर्व मंत्री शिवनारायण जागीरदार, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र वशिष्ठ, मंडी समिति अध्यक्ष बहादुरसिंह बोरमुंडला, पत्रकार गोपाल वाजपेयी, बॉबी शुक्ला, जेसी बौरासी, राम भागवत, दीप्तेश गुरु, विनीता शर्मा, विवेक जोशी, वीरेंद्र कावडिय़ा, पार्षद संजय कोरट, गोपाल बागरवाल ने आरती की। श्री गुजराती रामी माली समाज, न्यू खंडेलवाल महिला मंडल, अग्रवाल नवयुवक परिषद व अन्य संस्थाओं ने गुरुजी का अभिनंदन किया।