मप्र विधानसभा चुनाव: 75% से अधिक मतदान,सत्ता का फैसला 11 को

अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर नए मप्र में अब तक की ऐतिहासिक वोटिंग करके वोटर ने अपनी ताकत दिखा दी। बुधवार को दिनभर उतार-चढ़ाव और दोपहर के समय धीमी गति से वोटिंग के बाद जैसे ही दिन ढला वोटर ऐसे एक्टिव हुए कि मप्र में 75 फीसदी वोटिंग करके इतिहास बना दिया।यह 2013 के चुनाव परिणाम से (72.18%) से 2.82 फीसदी और 2008 (69.28) से 6.72 फीसदी ज्यादा है। यानी मतदान के दिन वोटरों की जीत हुई, पर प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला 11 दिसंबर को ही होगा। चुनाव विश्लेषकों ने पिछली बार मतदान बढ़ने के पीछे नरेंद्र मोदी  लहर का बड़ा फैक्टर बताया था, क्योंकि तब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी को पीएम इन वेटिंग घोषित किया था। केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ माहौल भी था, जिसने वोटरों को बाहर निकाला। पांच साल बाद फिर मप्र में लगभग उतने ही वोट बढ़ गए हैं।

लेकिन इस बार विश्लेषकों के पास कोई ठोस तर्क नहीं है। वे मानते हैं कि न चुनावी लहर है और न मुद्दों की हवा, फिर भी महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों ने जमकर वोटिंग करके गफलत में डाल दिया है। उनका कहना है कि देश में जब भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ता है तो वह सत्ता के विरोध में जाता है, मगर मप्र में पिछले तीन चुनावों में यह बढ़ोतरी कुछ और ही परिणाम सामने रख रही है।