महाकाल मंदिर के बजट पर तीन माह देरी से होगी चर्चा

उज्जैन। शासकीय विभागों में सामान्य तौर पर बजट मार्च माह में पास होने के साथ अप्रैल माह से लागू हो जाता है लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता की वजह से महाकाल मंदिर का बजट पास नहीं हो पाया। १९ जून को मंदिर प्रबंध समिति की बैठक होने जा रही है जिसमें मंदिर के बजट को लेकर चर्चा के बाद उसे पास किया जायेगा। बजट पास होने के साथ ही मंदिर से जुड़े विकास कार्यों को गति मिलेगी। इस बार बजट में कर्मचारियों को वेतन बढऩे की आस भी है।
वित्तीय वर्ष 2019-20 का महाकालेश्वर मंदिर समिति का बजट पास नहीं होने के कारण मंदिर और अन्य विकास कार्यों से संबंधित टेंडर नहीं हो पाये हैं। कर्मचारियों का पिछले तीन वर्षों से वेतन नहीं बढ़ा। ड्रेसकोर्ड को लेकर भी निर्णय होना है। इसके अलावा मंदिर समिति द्वारा संचालित की जा रही गौशाला, उसके रखरखाव और आधुनिकीकरण को लेकर भी निर्णय होने की संभावना है। महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा मंदिर प्रबंध के अलावा गौशाला, वैदिक शोध संस्थान, अन्नक्षेत्र, एम्बुलेंस आदि सेवाएं भी संचालित की जाती हैं। खास बात यह कि गौशाला में वर्तमान में 140 गायें हैं जिनमें से 130 गायें दूध नहीं देतीं लेकिन उनके भोजन और स्वास्थ्य की देखरेख मंदिर समिति के कर्मचारी ही करते हैं।

श्रावण मास हो या शिवरात्रि, भगवान शंकर से जुड़े सभी पर्वों पर महाकालेश्वर मंदिर में भगवान के दर्शनों के लिये हजारों की संख्या में लोग देशभर से पहुंचते हैं। मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारी हमेशा ऐसी योजनाएं बनाते हैं जिसमें श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन लाभ मिले, जबकि देश के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में ऐसा नहीं होता। श्रद्धालु जब मंदिर में दर्शनों को पहुंचते हैं तो वह भक्ति भाव से ओतप्रोत होते हैं और उन्हें जल्दी अथवा देरी से दर्शन की चिंता नहीं होती लेकिन सुविधाओं की दरकार रहती है। यदि मंदिर समिति द्वारा कतार में लगने वाले श्रद्धालुओं को शौचालय, पीने के पानी, दवाओं आदि सहित चाय नाश्ते की सुविधाएं अन्य मंदिरों की तरह प्रदान करे तो लोग तीन की जगह 6 घंटे भी कतार में लगकर दर्शन कर सकते हैं। पुजारी आशीष गुरु ने चर्चा में बताया कि देश के अन्य प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं को इस प्रकार की सुविधाएं मिलती हैं और वह अधिक समय लगने के बावजूद भगवान के दर्शन करते हैं।

मंदिर में यह हैं अव्यवस्थाएं
वर्तमान में महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में कई अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं जिन्हें प्रशासक सहित अन्य अधिकारी प्रतिदिन देखते हैं। गर्मी से तपती फर्श पर श्रद्धालुओं के लिये मेटिंग बिछाये हैं लेकिन उन पर पानी नहीं डाला जा रहा। प्रवेश द्वार के ठीक सामने निर्गम द्वार का बोर्ड लगाया गया है। परिसर में श्रद्धालु इसी गफलत में रहते हैं कि कहां से मंदिर में जाना है और कहां से बाहर आना है। मार्गदर्शन के लिये कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। सफाई के नाम पर हजारों लीटर पानी नालियों में बहाया जाता है।

शासन की योजनाओं का लाभ मिले
पुजारी आशीष गुरु ने बताया कि मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में पुजारियों की तरफ से मांग रखी जायेगी कि मप्र शासन द्वारा समस्त मंदिरों के पुजारियों के लिये मानदेय बढ़ोत्तरी की घोषणा की गई है उसका लाभ किस प्रकार दिया जा सकता है। इसके अलावा मानदेय बढ़ाने और शासन द्वारा जो सुविधाएं दी जा रही हैं उन्हें लागू करने पर चर्चा की जायेगी। जिसका लाभ शहर के अन्य मंदिरों के पुजारियों को भी मिलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा अपने घोषणा पत्र में इसका उल्लेख भी किया गया था।