महावीर जयंती जैनियों में महावीर जन्म कल्याणक के नाम से मनाई जाती

महावीर जयंती हर साल विशेषरुप से जैन धर्म और अन्य धर्मों के लोगों के द्वारा महान संत, महावीर के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। महावीर स्वामी जैनों के 24वें और अन्तिम तीर्थांकर थे, जिन्होंने जैन धर्म की खोज करने के साथ ही जैन धर्म के प्रमुख सिद्धान्तों को स्थापित किया।

इनका जन्म 540 ईसा पूर्व शुक्ल पक्ष के चैत्र माह के 13वें दिन, बिहार के वैशाली जिले के कुंडलग्राम में हुआ था। इसी कारण महावीर जयंती हर साल 13 अप्रैल को बहुत अधिक उत्साह और आनंद के साथ मनाई जाती है।

यह जैनियों के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण और पारंपरिक उत्सव है। इसे पूरे भारत में राजपत्रित अवकाश के रुप में घोषित किया गया है, इस दिन सभी सरकारी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थाओं का अवकाश रहता है।

महावीर जयंती समारोह

महावीर जयंती जैनियों में महावीर जन्म कल्याणक के नाम से मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह हर साल वार्षिक रुप से मार्च या अप्रैल के महीने में पड़ती है। यह पूरे देश के सभी जैन मंदिरों में बहुत अधिक जोश के साथ मनाई जाती है। महावीर से जुड़े हुए सभी मंदिरों और स्थलों को इस विशेष अवसर पर फूलों, झंडों आदि से सजाया जाता है।

इस दिन, समारोह और पूजा से पहले महावीर स्वामी की मूर्ति को पारंपरिक स्नान कराया जाता है और इसके बाद भव्य जूलुस या शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दिन गरीब लोगों को कपड़े, भोजन, रुपये और अन्य आवश्यक वस्तुओं को बाँटने की परंपरा है। इस तरह के आयोजन जैन समुदायों के द्वारा आयोजित किए जाते हैं।

बड़े समारोह उत्सवों का गिरनार और पालीताना सहित गुजरात, श्री महावीर जी, राजस्थान, पारसनाथ मंदिर, कोलकाता, पावापुरी, बिहार आदि में भव्य आयोजन किया जाता है।

यह लोगों के द्वारा स्थानीय रुप से महावीर स्वामी जी की मूर्ति का अभिषेक करके मनाया जाता है। इस दिन, जैन धर्म के लोग शोभायात्रा के कार्यक्रम में शामिल होते हैं। लोग ध्यान और पूजा करने के लिए जैन मंदिरों में जाते हैं।

कुछ महान जैनी लोग, जैन धर्म के सिद्धान्तों को लोगों तक पहुँचाने के लिए मंदिरों में प्रवचन देते हैं।